नई दिल्ली, जेएनएन। टेरर फंडिंग और लश्कर आतंकियों तक सूचनाएं पहुंचाने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने अपने पूर्व अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी और कश्मीर के कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज खुर्रम समेत सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। शुक्रवार को पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआइए अदालत में जांच एजेंसी ने सभी आरोपितों के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में हिस्सा लेने, आतंकी घटनाओं को अंजाम देने, आतंकियों तक रुपये पहुंचाने और आतंकियों की भर्ती करने जैसे गंभीर आरोप में आरोपपत्र दायर किया है।

इन्‍हें बनाया गया आरोपी

आरोपपत्र में नेगी और खुर्रम के अलावा मुनीर अहमद कटारिया, अर्शिद अहमद टोंच, बिहार के जफर अब्बास और बंगाल के रामभवन प्रसाद के संग चंदन महतो को भी आरोपी बनाया गया है। नेगी को इस वर्ष फरवरी माह में गिरफ्तार किया गया था। अरविंद दिग्विजय नेगी पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक सदस्य को गोपनीय दस्तावेज लीक करने के आरोप है। खुर्रम को पिछले वर्ष नवंबर में गिरफ्तार किया गया था। 

आतंकी घटनाओं के लिए एक नेटवर्क चलाने की साजिश

राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआइए ने स्वत: संज्ञान लेते हुए नवंबर 2021 में मामला दर्ज किया था। एनआइए के मुताबिक खुर्रम परवेज ने मुनीर अहमद कटारिया, अर्शीद अहमद टोंच और जफर अब्बास के साथ मिलकर लश्कर की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और भारत में आतंकी घटनाओं के लिए एक नेटवर्क चलाने की साजिश रची थी।

लश्कर-ए-तैयबा तक पहुंचाई थी संवेदनशील जानकारियां

आरोपितों ने सुरक्षा बलों के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, तैनाती और आवाजाही के बारे में जानकारी जुटाकर लश्कर-ए-तैयबा तक पहुंचाई थी। आरोप है कि हिमाचल में रहने वाले एनआइए के अधिकारी नेगी (Arvind Digvijay Negi) ने उन्‍हें आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए दस्तावेज उपलब्ध कराए। रामभवन प्रसाद और चंदन महतो पर भी आरोप है कि उन्होंने जाली पहचान दस्तावेज बनाए थे और उनका इस्तेमाल सिम कार्ड हासिल करने और बैंक खाते खोलने के लिए किया था।

Edited By: Krishna Bihari Singh