बसों के डिजाइन में 'जानलेवा' खामियों पर NHRC ने जताई चिंता, कार्रवाई की मांग की
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सार्वजनिक परिवहन बसों में 'घातक डिजाइन खामियों' को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। एनएचआरसी ने सड़क परिवहन मंत्रालय से सुरक्षा मानदंडों का सख्ती से पालन कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।

बसों के डिजाइन में 'जानलेवा' खामियों पर NHRC ने जताई चिंता (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक शिकायत पर संज्ञान लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है जिसमें सार्वजनिक परिवहन बसों में संभावित रूप से 'घातक डिजाइन खामियों' को उजागर किया गया है।
इसमें यात्रियों की सुरक्षा और वाहन को अनुमोदन देने में व्यवस्थागत लापरवाही पर चिंता जताई गई है। एनएचआरसी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सुरक्षा मानदंडों का राष्ट्रव्यापी प्रवर्तन सुनिश्चित करने, नियमों का पालन न करने वाली सभी बसों को राज्य स्तर पर वापस बुलाने और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की लापरवाही की आपराधिक जांच करने का निर्देश देने को भी कहा है।
NHRC ने क्या मांग की?
एनएचआरसी ने ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पीडि़तों और उनके परिवारों के लिए मुआवजा तंत्र की भी मांग की है। पत्र में कहा गया है कि शिकायत में ''सुरक्षा डिजाइन में सुधार अनिवार्य करने, जवाबदेही तय करने और प्रभावित पीडि़तों और परिवारों को मुआवजा सुनिश्चित करने'' के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
एनएचआरसी रजिस्ट्री को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और पुणे स्थित केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान के निदेशक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। उनसे आरोपों की जांच करने और दो सप्ताह के भीतर एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है ताकि एनएचआरसी इसकी समीक्षा कर सके।
उल्लेखनीय है कि एनएचआरसी की ओर से राज्यों को यह पत्र उस शिकायत के जवाब में लिखा गया है जिसमें राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर राजमार्ग पर 14 अक्टूबर, 2025 को स्लीपर बस में लगी भीषण आग का उल्लेख किया गया है।
इस दुखद हादसे के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआइआरटी) द्वारा किए गए एक निरीक्षण में अनिवार्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया, जिसमें अग्नि शमन प्रणालियों का अभाव और अनुचित रूप से डिजाइन की गई आंतरिक संरचना शामिल थे।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
एनएचआरसी के अनुसार, ''शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक परिवहन बसों के डिजाइन में एक बार-बार होने वाली और घातक खामी यात्रियों के जीवन को खतरे में डाल रही है। विशेष रूप से, कुछ बसों में ड्राइवर का केबिन यात्रियों के कंपार्टमेंट से पूरी तरह से अलग होता है, जिससे आपात स्थिति के दौरान आग का समय पर पता लगाना और संचार करना मुश्किल हो जाता है। शिकायत में हाल की घटनाओं का उल्लेख है जहां यात्री बसों में यात्रा के दौरान आग लग गई, जिससे मौतें हुईं जिन्हें रोका जा सकता था।''
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया है कि इस तरह के असुरक्षित डिजाइन संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हैं। साथ ही, उन्होंने बस निर्माताओं और अनुमोदन प्राधिकारियों द्वारा की गई व्यवस्थागत खामियों की ओर भी इशारा किया है।

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