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NHAI New Rule: सड़क हादसे के बाद 10 मिनट में पहुंचेगी एंबुलेंस, देरी हुई तो लगेगा 10000 का जुर्माना

By Jitendra SharmaEdited By: Garima Singh
Published: Wed, 12 Aug 2026 09:30 PM (GMT+05:30)

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क हादसों में एंबुलेंस की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं।

(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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संक्षेप में पढ़ें

जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना होने पर घायलों को तुरंत एंबुलेंस की सुविधा मिल सके, इसके लिए वैसे तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम-कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (ईआरएस-सीएडी) पहले ही शुरू कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्राधिकरण के सामने जब लापरवाही की शिकायतें आईं तो अब सुधार के लिए और सख्त कदम उठाए गए हैं।

सर्विस लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) में दंड प्रविधान कड़े किए गए हैं। हर गलती पर सजा का प्रविधान है। अब यदि एंबुलेंस हादसे की सूचना मिलने के बाद देरी से पहुंची तो उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, सूचना मिलते ही दो मिनट में न चली एंबुलेंस तो प्रति मिनट देरी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

एंबुलेंस को हादसे के 10 मिनट में पहुंचना होगा

एनएचएआई केयर सिस्टम के नियमों के तहत एंबुलेंस को सूचना की स्वीकृति के बाद 10 किलोमीटर के भीतर किसी भी हादसा स्थल पर पहुंचने में 10 मिनट से अधिक का समय नहीं लगना चाहिए।

नेशनल हाईवे पर तैनात एंबुलेंस, क्रेन और गश्ती वाहन के बेहतर प्रबंधन के लिए ही एनएचएआइ ने इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम शुरू किया था। इसके साथ ही इन सभी संबंधित वाहनों में एआइएस-140 जीपीएस उपकरण लगाए गए।

प्रत्येक आन-रोड वाहन को आइओटी सिम लगा एंड्रायड मोबाइल दिया गया है। यह एनएचएआइ केयर मोबाइल एप्लीकेशन से जुड़ा है जो कि दुर्घटनास्थल से संबंधित जानकारी सड़क पर तैनात वाहन तक पहुंचाता है और आपातकाल के दौरान की गई कार्यवाही सहित डाटा को एकत्र करता है।

इसके अलावा प्रत्येक घटना प्रबंधक यानी इंसिडेंट मैनेजर को आइओटी सिम युक्त एंड्रायड टैबलेट दिया गया है। यह भी एनएचएआइ केयर डैशबोर्ड एप्लिकेशन से जुड़ा है, जो कि आइएम को वाहनों को ट्रैक करने और दुर्घटना के प्रबंधन की रीयल टाइम मानीटरिंग में सहायता करता है।

हाइवे पर वाहनों की रियल टाइम निगरानी 

एक केंद्रीय काल सेंटर है जो 24 घंटे काम करता है। इतनी व्यवस्थाओं के बावजूद एनएचएआइ ने पाया है कि एनएचएआइ केयर डैशबोर्ड और एनएचएआइ केयर एप्लिकेशन का सही से उपयोग नहीं हो रहा है, जिसके कारण दुर्घटना के बाद रिस्पांस टाइम नहीं सुधर पा रहा है।

सबसे बड़ी बाधा यह है कि ऑन-रोड वाहनों की आनलाइन उपलब्धता भी नहीं दिख पा रही है। अब प्रत्येक वाहन के लिए आइएमएस केयर सिस्टम का उपयोग अनिवार्य करते हुए एनएचएआइ ने दंड प्रविधान बना दिए हैं। इसमें यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि हाईवे पर यदि किसी प्रोजेक्ट के दायरे के बाहर, आसपास भी कोई दुर्घटना होती है और वहां अन्य एंबुलेंस उपलब्ध न हो तो वहां भी पहुंचना होगा।

उल्लंघनों पर ये लगेगा जुर्माना

  • वाहनों द्वारा एनएचएआइ केयर एप्लिकेशन का उपयोग न करने पर प्रतिदिन 2,500 रुपये।
  • घटना प्रबंधक द्वारा एनएचएआइ केयर का इस्तेमाल न करने पर प्रतिदिन 2,500 रुपये।
  • ऑन-रोड यूनिट में एआइएस-140 अनुपालक जीपीएस न होने पर प्रतिदिन 2,500 रुपये।
  • आइएमएस केयर डैशबोर्ड पर एंबुलेंस आनबोर्ड न होने पर प्रतिदिन 2,500 रुपये।
  • एनएचएआई केयर एप पर सूचना स्वीकार करने में देरी पर प्रति मिनट 5000 रुपये।
  • एनएचएआई केयर एप पर आन-रोड इकाइयों द्वारा सूचना अस्वीकार करने पर प्रत्येक घटना पर 10 हजार रुपये।
  • अस्पताल तक पहुंचने में देरी पर प्रति घटना 10 हजार रुपये।
  • निरीक्षण के दौरान उपकरण और दवाओं में कमी या स्टाफ की अनुपलब्धता पर- प्रति निरीक्षण 10 हजार रुपये।

हर दिन पांच किलोमीटर की रन माक ड्रिल अनिवार्य

हर एंबुलेंस को हर चौबीस घंटे में कम से कम पांच किलोमीटर की रन माक ड्रिल करनी होगा। यदि किसी दिन एंबुलेंस किसी दुर्घटना के मामले में पांच किलोमीटर से अधिक का आवागमन करती है तो उसे इससे छूट रहेगी। इस नियम का पालन न करने पर भी 10 हजार रुपये का मासिक जुर्माना लग सकता है।

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