विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

NHAI ने तय की हाईवे परियोजनाओं के लिए निर्माण अवधि, अब लागत और जटिलता के आधार पर तय होगी समय-सीमा

By Jitendra SharmaEdited By: Shubham Kumar
Published: Wed, 28 Oct 2026 08:25 PM (IST)

एनएचएआई ने अब हाईवे परियोजनाओं के लिए निर्माण अवधि को सड़क की लंबाई के बजाय कुल सिविल लागत और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित किया है।

(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. सिविल लागत पर आधारित नई निर्माण अवधि प्रणाली।

  2. जटिलता, भूगोल के अनुसार अतिरिक्त समय का प्रावधान।

  3. बड़े पुलों, सुरंगों के लिए अलग मानक निर्धारित।

जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। अब तक हाईवे परियोजनाओं में सामान्यत: सिर्फ सड़क की लंबाई के आधार पर उसकी समय अवधि निर्धारित कर दी जाती थी। इसके बाद जब भौगोलिक परिस्थितियों या अन्य तकनीकी चुनौतियों के कारण उसमें विलंब होता तो परियोजना की लागत बढ़ती, आर्बिट्रेशन या विवाद की स्थिति की बनती।

इस समस्या को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अलग-अलग परिस्थितियों की परियोजनाओं के लिए कुल सिविल लागत के आधार पर निर्माण अवधि तय कर दी है।

यह नई व्यवस्था हाईवे निर्माण के तीनों प्रकार के अनुबंध हाइब्रिड एन्युटी माडल (एचएएम), इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) और बिल्ड, आपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) पर लागू होगी।

एनएचएआई ने तय कर दिया है कि मैदानी और सामान्य पहाड़ी क्षेत्र में कुल सिविल लागत को देखते हुए आधार निर्माण अवधि लागू होगी। इसमें 300 करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए 12 महीने, 301 से 500 करोड़ रुपये तक 18 महीने, 501 से 1500 करोड़ रुपये तक 24 महीने और 1500 करोड़ से अधिक सिविल लागत की परियोजनाओं के लिए 30 महीने आधार निर्माण अवधि होगी।

हालांकि, परियोजना की जटिलता के आधार पर अतिरिक्त समय दिए जाने का प्रविधान रहेगा। जैसे कि परियोजना में यदि कई आरओबी या फ्लाईओवर होंगे तो नियम-शर्तों के अनुसार अतिरिक्त समय दिया जाएगा। 10 किलोमीटर या उससे अधिक लंबी एलिवेटेड स्ट्रक्चर वाली परियोजना के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। पूरे प्रोजेक्ट में यदि कंक्रीट पेवमेंट होगा तो निर्माण अवधि बढ़ाई जाएगी।

कुछ परियोजनाओं में विशिष्ट कठिनाइयां सामने आने पर डीपीआर कंसल्टेंट छह महीने अतिरिक्त समय की सिफारिश कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि बढ़ी हुई आधार निर्माण अवधि की अधिकतम सीमा लागत के अनुसार अधिकतम 24, 30 या 36 महीने ही होगी।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अतिरिक्त समय- कठिन भूभाग में कटिंग और ढलान को देखते हुए 12 महीने की अतिरिक्त अवधि दी जाएगी। जिन क्षेत्रों में लंबा मानसून रहता है, वहां की परियोजनाओं के लिए तीन महीने अतिरिक्त समय रहेगा। इसी तरह अंडमान निकोबार में लाजिस्टिक्स एवं सामग्री उपलब्धता की कठिनाई को देखते हुए ठेकेदार फर्म को कुल 24 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

बड़े पुलों और सुरंग के लिए भी अलग मानकएनएचएआई के अनुसार, प्रमुख नदियों पर लंबे एवं विशेष पुलों के लिए अलग-अलग निर्माण अवधि तय की गई है। ब्रह्मपुत्र, गंगा जैसी नदियों पर 6-10 किलोमीटर लंबे पुलों के लिए लगभग 72 महीने मिलेंगे। 2.5-6 किमी के कुछ विशेष पुलों के लगभग 60 महीने और 1.5-2.5 किमी के कुछ पुलों के लिए लगभग 48 महीने की अवधि रहेगी।

ये मानक संबंधित पुलों के प्रकार और तकनीकी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेंगे। इसी तरह दो किलोमीटर तक की सुरंग के लिए भारत के पश्चिमी हिस्से में 24 महीने, हिमालयी क्षेत्र में 36 महीने, जबकि शेष शहरी क्षेत्र या पानी के नीचे टीबीएम से सुरंग बनाने के लिए 18 महीने तय किए गए हैं। सुरंग की लंबाई प्रत्येक अतिरिक्त एक किलोमीटर बढ़ने पर पश्चिमी घाट में चार महीने, हिमालय में छह महीने और शहरी व टीबीएम श्रेणी में तीन महीने अतिरिक्त समय मिलेगा।