नई दिल्ली,पीटीआइ। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने रेलवे साइडिंग पर सीमेंट जैसे माल की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान होने वाले प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही सार्वजनिक ट्रांसपोर्टर को इसके लिए एक उपयुक्त तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है।  रेल शब्दावली में साइडिंग, एक रनिंग लाइन से अलग कम गति वाला ट्रैक सेक्शन है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश के निवासी शिवांश पांडे द्वारा फैजाबाद में और उसके आसपास रेलवे गोदाम में प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बात कही।  दलील ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों से हवा प्रदूषित हो रही थी और सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर रही थीं। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले ही रेलवे को निर्देश दिया है कि वह लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान सुरक्षा मानदंडों को अपनाने के अलावा, वायु प्रदूषण को रोकने के लिए फैजाबाद में एक कवर शेड का निर्माण और पानी का छिड़काव करे ताकी धूल कम उड़े।

एनजीटी ने कहा कि अपेक्षित सहमति लेने के अलावा फैजाबाद में रेलवे प्रशासन ने लोडिंग और अनलोडिंग के लिए अपनाएं जाने वाले नियमों का पालन नहीं कर रहा है। यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बाकी रेलवे साइडिंग और अच्छे शेड के अन्य स्थानों पर भी ऐसी ही स्थिति हो सकती है।  साथ ही कहा कि रेलवे बोर्ड द्वारा इनकी जांच के लिए एक तंत्र जाना चाहिए।

इस ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित अतिरिक्त डीआरएम (ऑपरेशंस) लखनऊ ने एक बयान में कहा कि कानून लागू करने और आवश्यक सुरक्षा उपायों के लिए अब एक महीने के अंदर-अंदर कदम उठाए जाएंगे। अधिकारी इस ट्रिब्यूनल से पहले भी कदम उठा सकते हैं और अपनी रिपोर्ट दर्ज रेलवे को दर्ज करवा सकते हैं। जानकारी केअनुसार रेलवे बोर्ड ऐसे बाकी स्थानों के बारे में उचित जानकारी इकट्ठी कर सकता है और एक व्यापक रिपोर्ट पेश कर सकता है।

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