'न्यूजक्लिक को मिली 86 करोड़ की अवैध विदेशी फंडिंग', ED ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में न्यूजक्लिक के खिलाफ नई याचिका दायर की है, जिसमें समाचार पोर्टल को मिली 86 करोड़ की विदेशी फंडिंग पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।


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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईडी ने न्यूजक्लिक मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है। जिसमें एजेंसी ने समाचार पोर्टल के स्वामित्व और विदेशी संस्थाओं के साथ उसके सर्विस एग्रीमेंट्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ईडी का आरोप है कि न्यूजक्लिक को लगभग 86 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली, जिसे कानूनी जांच से बचाने के लिए जानबूझकर वैध व्यावसायिक लेनदेन के रूप में पेश किया गया।
विदेशी दान को बिजनेस पेमेंट दिखाने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, मामला केवल विदेशी धन प्राप्त करने का नहीं है, बल्कि विदेशी चैरिटी को निवेश और व्यावसायिक भुगतान के रूप में दिखाने की सुनियोजित साजिश का है।
ईडी का कहना है कि ऐसा भारतीय समाचार संगठनों के लिए तय विदेशी फंडिंग के कड़े नियमों से बचने के लिए किया गया।
एजेंसी ने अपने दावों के समर्थन में बरामद ईमेल, वित्तीय लेनदेन, कंपनी के दस्तावेज, वैल्यूएशन रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को सबूत के तौर पर पेश किया है।
पीपल्स डिस्पैच और अमेरिकी संस्था के बीच सस्पीशियस लेनदेन
ईडी ने पीपल्स डिस्पैच वेबसाइट के साथ न्यूजक्लिक के संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं। एजेंसी के अनुसार, यह वेबसाइट पहले न्यूजक्लिक के नियंत्रण और स्वामित्व में थी, जबकि अमेरिका की जस्टिस एंड एजुकेशन फंड इस पर कंटेंट अपलोड करने के लिए न्यूजक्लिक को पैसे दे रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता कोई वास्तविक व्यावसायिक सौदा नहीं था, बल्कि न्यूजक्लिक को नियमित रूप से विदेशी धन पहुंचाने का एक जरिया था।
बयान के मुताबिक, JEF ने अप्रैल 2021 से इस वेबसाइट का मालिकाना हक लिया, जबकि उससे पहले सामग्री की गुणवत्ता और शर्तें न्यूजक्लिक की टीम ही तय करती थी।
सरकारी अनुमति से बचने के लिए ईमेल का खेल
ईडी ने 21 अगस्त 2017 के एक ईमेल का हवाला दिया, जो पोर्टल के पूर्व एचआर हेड अमित चक्रवर्ती द्वारा भेजा गया था। एजेंसी का आरोप है कि इस ईमेल में स्पष्ट लिखा था कि कंपनी के दस्तावेजों में बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अनुमति के बिना विदेशी निवेश हासिल किया जा सके।
एजेंसी न्यूज़क्लिक के ट्राइकॉन्टिनेंटल और अन्य अंतरराष्ट्रीय फंड्स के साथ संबंधों की भी जांच कर रही है। जनवरी 2018 के एक अन्य ईमेल से पता चला कि गैर-लाभकारी संगठन (एनजीओ) के रूप में विदेशी अनुदान की अनुमति लेने के बजाय, एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर अमेरिकी निवेश हासिल करने की योजना बनाई गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला अमेरिकी टेक उद्यमी नेविल रॉय सिंघम, ट्राइकॉन्टिनेंटल और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों से जुड़े कथित संबंधों की रिपोर्ट सामने आने के बाद और अधिक गंभीर हो गया है।
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