नई दिल्ली [यशा माथुर]। केंद्र सरकार जिस नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है वह काफी हद तक छात्रों के फायदे में नजर आ रही है। विशेषकर उच्‍च शिक्षा हासिल करने वाले बच्‍चों के लिए नए रास्‍ते खुलेंगे। वे अपनी शिक्षा, शोध और स्‍टार्टअप्‍स को मैनेज कर पाऐंगे।

स्‍टार्टअप वाले बच्‍चे होंगे लाभान्‍वित 

इस शिक्षा नीति की खास बात यह है कि छात्रों को हर साल की डिग्री मिलेगी। इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (बहु स्तरीय प्रवेश एवं निकासी) व्यवस्था को लागू किया गया है। मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में 1 साल के बाद सर्टिफिकेट, 2 साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। इससे छात्रों को बड़ा लाभ होने वाला है।

किसी कारण से एक साल या दो साल के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को एक अंतराल के बाद फिर आगे की पढ़ाई जारी करने की सुविधा मिलेगी। इससे उन बच्‍चों को बहुत फायदा मिलेगा जो कॉलेज शिक्षा के दौरान ही अपना स्‍टार्टअप शुरू कर लेते हैं। वे पढ़ाई से छोटा ब्रेक लेकर दोनों काम कर पाऐंगे। पहले यह सुविधा नहीं मिलती थी। 

छात्र सशक्‍त होंगे 

यह नीति शोध को बढ़ावा देने में कारगर साबित होगी। जो छात्र रिसर्च में जाना चाहेंगे उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। इसके बाद वे एक साल का एमए कर सीधे पीएचडी कर सकते हैं। एमफिल को समाप्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्‍त 'नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' के नाम से एक नई संस्था बनेगी।

शिवनाडर विश्वविद्यालय ‍के वाइस चांसलर डा. रूपामंजरी घोष 'नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' बनाए जाने का स्‍वागत करते हैं और कहते हैं कि शोध केंद्र बनाने में हमारा संस्‍थान भी आगे आएगा। उनका मानना है कि इस शिक्षा नीति से देश के छात्र सशक्‍त होंगे और उन्‍हें अपनी प्रतिभा के विकास का समुचित अवसर मिलेगा। 

एक संस्‍था करेगी कंट्रोल, होगी सहूलियत 

इस शिक्षा नीति में (लॉ और मेडिकल शिक्षा को छोड़कर) उच्च शिक्षा के लिए सिंगल रेग्युलेटर (एकल नियामक) 'हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया' बनाने के लिए कहा गया है जो ढेर सारी मुश्किलों को हल करेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय के वीसी रह चुके प्रोफेसर दिनेश सिंह का मानना है कि उच्च शिक्षा की एक बड़ी कमी थी ढेर सारी संस्थाओं के हाथ में नियंत्रण। इस नियंत्रण के कारण विश्वविद्यालयों को आजादी नहीं मिल पाती थी।

यूजीसी के नियमों और एआईसीटीई के निर्देशों के साथ तालमेल बिठाते-बिठाते शिक्षण संस्थान परेशान हो जाते थे। लेकिन अब एक संस्थान के हाथ में संचालन आने से सुविधा होगी और विश्वविद्यालय क्रिएटिव हो पाएंगे। प्रयोग कर पाएंगे। अलग -अलग बोर्ड के बच्चों को दाखिले में दिक्कत होती थी। कॉलेजों को कटऑफ निकालने में दिक्कत होती थी। अब कॉमन एंट्रेंस से ये दिक्कतें खत्म होंगी।

विषय चुनने की छूट से बढ़ेगी दिलचस्‍पी 

अगर विज्ञान पढ़ने वाले छात्र को संगीत चुनने की आजादी मिले और भूगोल पढ़ने वाला गणित भी पढ़ सके तो शिक्षा में उसकी रुचि हमेशा बनी रहेगी। नई शिक्षा नीति में छात्रों को यह आजादी मिली है वे अपनी मर्जी से कोई विषय चुन सकते हैं। 

Posted By: Vinay Tiwari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस