काठमांडू, आइएएनएस। भारत के मुकाबले नेपाल कहीं नहीं टिकता हो, लेकिन भूख के सूचकांक में हम उससे कहीं पीछे हुए हैं। नेपाल भारत ही नहीं पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों से भी कहीं आगे निकल गया है। ग्‍लोबल हंगर इंडेक्‍स के मुताबिक, नेपाल इन देशों की सूची में 72वें रैंक पर है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक, नेपाल भूख को कम करने के अभियान में नेपाल और अपने अन्‍य दक्षिण एशियाई पड़ोसियों से काफी तेजी से आगे निकल गया है। नेपाल में भूख को कम करने में तेजी से सुधार देखा गया है। अब नेपाल 'गंभीर' की श्रेणी से निकलकर 'मध्‍यम स्‍तर' में पहुंचने जा रहा है। स्‍थानीय वेबसाइट की खबर के मुताबिक, नेपाल में कुपोषण, बाल मृत्‍यु दर को निय‍ंत्रित करने के लिए काफी काम किया है। रिपोर्ट बताती है कि 1992 में नेपाल की जीएचआइ स्‍कोर 42.2 था, जो 2017 में 22 हो गया है। इसका अर्थ यह है कि नेपाल में भूख के स्‍तर में काफी कमी आई है।

बता दें कि जीएचआइ की गणना में उच्‍च आय वाले देशों और छोटी जनसंख्‍या वाले देशों को शामिल नहीं किया जाता है। नेपाल का जीएचआइ स्‍कोर साल 2000 में 'अलार्मिंग' श्रेणी में था। लेकिन अब इस सूची में नेपाल 72वें रैंक पर पहुंच गया है। दक्षिण एशियाई देशों में नेपाल, श्रीलंका(84), बांग्लादेश (90), भारत (100), पाकिस्तान (107) और अफगानिस्तान (111) से आगे है।

इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) के अनुसार, भारत में भूख एक 'गंभीर' समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें स्‍थान पर है। भारत उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे है, लेकिन पाकिस्तान से आगे हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण (मेल न्यूट्रीशन) की उच्च दर से देश में भूख का स्तर इतना गंभीर है कि पिछले साल भारत इस इंडेक्स में 97वें स्थान पर था और अब 100वें स्थान पर है, यानी इस साल वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत और 3 स्थान पीछे चला गया है।

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