जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। तो क्या पीएनबी में हुए बैंकिंग घोटाले के लिए कहीं नियमों में ढिलाई ही तो मुख्य तौर पर जिम्मेदार नहीं है। संकेत तो कुछ ऐसे ही है, क्योंकि इतना बड़ा घोटाला हो जाने के बावजूद रिजर्व बैंक ने अभी भी बैंकों के लिए स्विफ्ट के संदेशों को कोर बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की बाध्यता लागू नहीं की है। नियम के इस लोचे का फायदा ही पीएनबी की दक्षिण मुंबई स्थित शाखा के कर्मचारियों ने उठाया है।

उन्होंने नीरव मोदी व उसकी सहयोगियों की कंपनियों के पक्ष में भुगतान के लिए स्विफ्ट के जरिए संदेश दिए उसका सीबीएस में कहीं उल्लेख नहीं किया। पीएनबी प्रबंधन का कहना है कि इस वजह से इतने वर्षो तक यह धोखाधड़ी नहीं पकड़ी जा सकी। आरबीआइ के नियम के मुताबिक हर बार स्विफ्ट भुगतान को सीबीएस में दर्ज करने की जरुरत नहीं है।

स्विफ्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान करने का आदेश देने वाला एक खास इलेक्ट्रॉनिक वित्तीय प्लेटफार्म (एक तरह से संदेश व्यवस्था) है। पीएनबी की शाखा से इलाहाबाद बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआइ आदि की विदेशी शाखाओं को नीरव मोदी के पक्ष में भुगतान के लिए इसी तकनीक के इस्तेमाल से संदेश भेजा जा रहा था। मोटे तौर पर बैंक कर्मचारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वह इस वित्तीय लेन-देन को तुरंत ही सीबीएस में प्रदर्शित करे। लेकिन बैंक कर्मचारी ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं है। यह बात पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक की तरफ से बैंकों को जारी नए निर्देश में भी कही गई है। लेकिन आरबीआइ के नियमों के मुताबिक बगैर सीबीएस में दर्ज स्विफ्ट के जरिए लेन-देन की व्यवस्था बहुत कम होनी चाहिए। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक का नियम यह भी कहता है कि बैंक बुक या किसी दूसरे एकाउंटिंग सिस्टम में इस लेन देन को दर्ज किया जाना चाहिए। साथ ही स्विफ्ट के जरिए भुगतान का निर्देश भी पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही होना चाहिए। सीबीएस हर बैंक की अपनी सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली है जिसमें हर वित्तीय लेन-देन का लेखा जोखा होता है।

स्विफ्ट को लेकर पहले भी उठे सवाल

आरबीआइ की तरफ से बैंकों को भेजे गये सुझाव में यह बात स्वीकार की गई है कि अगस्त, 2016 के बाद से वह कम से कम तीन बार इस तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को लेकर चेतावनी दे चुका है। दरअसल, सिर्फ आरबीआइ ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी इस फाइनेंशियल प्लेटफार्म के जरिए होने वाले घोटाले को लेकर चिंताएं सामने आई है। सबसे पहले वर्ष 2016 में बांग्लादेश में हुए 8.1 करोड़ डॉलर के बैंकिंग फ्राड में स्विफ्ट की खामी सामने आई थी। माना गया था कि कुछ साइबर अपराधियों ने स्विफ्ट के जरिए ही बांग्लादेश के बैंकों से पैसे बाहर भेज दिए हैं। अभी हाल ही में भारत के निजी क्षेत्र के सिटी यूनियन बैंक ने कहा है कि उसके एक खाते से स्विफ्ट प्लेटफार्म का इस्तेमाल करके 20 लाख डॉलर बाहर भेज दिये गये हैं। दुनिया के कुछ दूसरे देशों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। और इसके समाधान के लिए यह जरुरी माना गया है कि स्विफ्ट को बैंकों के सीबीएस से पूरी तरह से जोड़ा जाए। अगर आरबीआई ने सख्ती दिखाते हुए भारत में यह नियम पहले लागू किये होते तो पीएनबी का यह घोटाला बहुत पहले ही पकड़ा जाता। 

By Manish Negi