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अतुल पटैरिया, नई दिल्ली। तिरुपन्नमूर गांव में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। जैन मंदिरों के लिए ख्यात इस गांव में ही नहीं बल्कि चेन्नई से लेकर कांचीपुरम और तिरुवन्नामलाई तक, करीब दो सौ किलोमीटर के इस पूरे बेल्ट में मानो एक अलग ही उत्साह है। यह उत्साह नया नहीं है बल्कि गत फरवरी से कायम है और जैसे-जैसे 15 अगस्त करीब आ रहा है, यह और भी बढ़ता जाता है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं करोड़ों दिलों के चहेते विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान के पैतृक गांव तिरुपन्नमूर की, जहां अपने इस लाड़ले को केंद्र में रखकर ही इस बार स्वातंत्रोत्सव मनेगा। स्थानीय छात्र टी. धनशेखरन ने बताया, बूढ़े हों, बच्चे हों या युवा, यहां हर कोई अभिनंदन का फैन है। बच्चों में अभिनंदन को लेकर कुछ खासा ही क्रेज है।

बड़े होकर फाइटर पायलट बनने का ख्बाव देखने लग गए हैं। अभिनंदन स्टाइल की मूछें युवाओं के लिए ट्रेंड बन चुकी हैं। इस स्वतंत्रता दिवस पर हमारे हीरो अभिनंदन ही केंद्र में होंगे। राजधानी चेन्नई से करीब 192 किमी दूर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के वेंबक्कम ब्लॉक का एक छोटा सा गांव है तिरुपन्नमूर। तहसील चेय्यर की तिरुप्पनमुर पंचायत में इस गांव के अलावा सुमंगली, पिलंथंगल, कागनम और चित्रथुर गांव भी शामिल हैं। वेंबक्कम ब्लॉक के अलावा चेय्यर तहसील के कांचीपुरम, अन्नकवूर और वालजाबाद ब्लॉक के दर्जनों गांवों सहित तिरुवतिपुरम, उथिरामेरुर, वंदावसी जैसे छोटे- बड़े नगर।

चेय्यर तहसील के दुसी गांव में मौजूद इलाके के एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज दुसी पॉलीटेक्निक कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग संकाय के छात्रों ए. विनोद, पी. करुणाकरन, जे. सत्यमूर्ति ने कहा, यहां ही नहीं इस पूरे क्षेत्र में अभिनंदन से बड़ा हीरो और कोई नहीं। जैसे रील लाइफ में रजनीकांत हैं, वैसे ही रीयल लाइफ में अभिनंदन। वह हमारे दिलों की धड़कन बन चुके हैं। विनोद ने कहा, हमें गर्व है कि हम हमारे इस हीरो की जन्मभूमि से ताल्लुक रखते हैं। कांचीपुरम से लगभग 19 किमी की दूरी पर स्थित तिरुपन्नमूर और कारंथई जुड़वा गांव हैं।

ऐतिहासिक शिलालेखों और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जैन मंदिरों के लिए ये दोनों ही गांव मशहूर हैं। इनके अलावा आसपास के गांवों में तमिल जैनियों की अच्छी खासी आबादी है। तिरुपन्नमूर गांव के एक वृद्ध आदिराजन ने बताया, अभिनंदन और उनके पिता का जन्म भी इसी गांव में हुआ। निकटवर्ती सेलय्युर शहर में अभिनंदन की परवरिश हुई। अभिनंदन के परिवार के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, वे चूंकि जैन हैं और यहां के जैन मंदिरों से उनके परिवार का गहरा जुड़ाव है। वे अक्सर कारंथई मंदिर जाते हैं।

स्थानीय निवासी आर. कार्तिक ने कहा, हमें अभिनंदन की प्रतीक्षा है। पूरा गांव उनके लिए पलक पांवड़े बिछाए। अवकाश मिलने पर जब भी वे अपने पैतृक गांव आएंगे, हमारे लिए वह खुशी का दिन होगा। वर्धमान परिवार की तीन पीढ़ियां देशसेवा में रत रही हैं। अभिनंदन ने तो अपने शौर्य और जज्बे से नया इतिहास ही लिख दिया। उन्होंने हमारे गांव और क्षेत्र को गर्व से भर दिया। यही वजह है कि स्कूलों, कॉलेजों सहित जहां कहीं भी स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही हैं, केंद्र में अभिनंदन हैं। उनकी गौरवगाथा ही इन कार्यक्रमों की थीम बन गई है। छात्र संतमूर्ति ने बताया, जम्मू-कश्मीर में हुए बड़े संवैधानिक बदलाव को लेकर भी यहां उत्सव का माहौल है। मानो लोगों की खुशी दोगुनी हो गई है। स्वतंत्रता दिवस दोगुने उत्साह से मनेगा।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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