रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। लॉकडाउन के बीच रेवाड़ी की सीमा से सटे राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का अभयारण्य (टाइगर रिजर्व) से एक बार फिर खुशी की खबर आई है। मंगलवार को सरिस्का में एक साथ तीन नए मेहमानों के आने की सूचना मिली। तीनों शावक बाघिन एसटी-12 के हैं। तीनों की फोटो मंगलवार को कैमरा ट्रैप से मिली, जिसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर जंगल से आई इस खुशी की खबर को सांझा किया। इसके साथ ही सरिस्का में टाइगरों का कुनबा 17 से बढ़कर 20 हो गया है।

बाघिन एसटी-12 ने दूसरी बार एक साथ तीन शावकों को जन्म दिया है। दो वर्ष पहले जन्में तीनों शावक अब टाइगर बन चुके हैं। सरिस्का में एक अन्य बाघिन ने भी इस वर्ष एक शावक को जन्म दिया था। सरिस्का से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित स्टाफ को बाघिन व शावकों की सुरक्षा एवं मानिटनिंग के बारे में जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं। फील्ड सहायकों की टीम बाघिन की तीन माह से मानिटरिंग कर रही थी।

सरिस्का से जुड़ी खास बातें

सरिस्का अभयारण्य करीब डेढ़ दशक पूर्व बाघ विहीन हो गया था। राजस्थान सरकार ने इसके बाद 28 जून 2008 को रणथंभौर के जंगल से हेलीकॉप्टर द्वारा पहला टाइगर मंगवाया। रणथंभौर से अलग-अलग समय पर कुल तीन बाघ व पांच बाघिन मिली थी। अब वन विभाग को एक बार फिर से पुराने दिन लौटने की उम्मीद है। जंगल के निकट से दो हाईवे गुजरना, सरिस्का में 26 गांवों की राजस्व सीमा शामिल होना और कई मंदिर होना वन्यजीवों के लिए खतरा बताया जाता है। पूर्व में शिकारियों की चर्चा भी चलती रही है। हालांकि वन विभाग अतीत के कड़वे अनुभव भूलकर अब अच्छे भविष्य की उम्मीद कर रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत ने भी मंगलवार को शुभकामनाएं दी है।

बाघ परियोजना सरिस्का के उप वन संरक्षक एसआर यादव ने बताया कि बाघिन एसटी-12 के तीन शावक कैमरा ट्रैप में कैद हो चुके हैं। तीनों शावक स्वस्थ हैं। नवजात शावकों व बाघिन की सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं। शावकों की उम्र दो से तीन माह हो सकती है। विभाग को मंगलवार को कैमरे के माध्यम से यह सूचना मिली है।

Posted By: Mangal Yadav

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