नई दिल्ली, प्रेट्र। दिल्ली-हरियाणा जल विवाद पर शीर्ष कोर्ट ने कहा, 'हमें केवल दिल्ली केंद्रित आदेश क्यों देना चाहिए। दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्य से पानी मांगने के बजाय खुद जल संरक्षण की अवधारणा का पालन क्यों नहीं करती।'

दिल्ली सरकार ने याचिका दाखिल कर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा को यमुना में पानी छोड़ने के लिए आदेश देने का आग्रह किया। दिल्ली सरकार की याचिका की सुनवाई गुरुवार को जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस दीपक गुप्ता व जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने की।

दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा के बीच 'राजनीतिक झगड़े' के कारण लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।' वकील ने कहा कि आज दिल्ली हरियाणा से पहले (1,600 क्यूसेक से ज्यादा) के मुकाबले कम (1,390 क्यूसेक) पानी की मांग कर रही है। पानी की जरूरत पर वकील ने जब दिल्ली में जनसंख्या वृद्धि की दलील दी तो खंडपीठ ने कहा, 'इसका जवाब जल संरक्षण है, न कि जल उत्पादन।' जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा, 'मैंने दिल्ली में लोगों को पेड़ों की सफाई के लिए पानी का इस्तेमाल करते देखा है। क्या यह पानी की बर्बादी नहीं है?'

इसके बाद खंडपीठ ने 1992 में इस मामले में एसडी सिन्हा द्वारा दायर एक याचिका का हवाला देते हुए कहा, 'इस तरह के मुकदमे बहुत खतरनाक हैं।'

दिल्ली सरकार के वकील ने स्पष्ट करते हुए कहा कि सिन्हा द्वारा दाखिल याचिका में दोनों राज्य पक्षकार थे। उन्होंने कहा कि वे अपना आवेदन वापस ले लेंगे और उचित कदम उठाएंगे। पीठ ने सिन्हा द्वारा दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि वह इसे साथ जारी रखने को इच्छुक नहीं है।

शीर्ष अदालत ने मई में लाभार्थी राज्यों के बीच यमुना नदी के पानी के वितरण का काम सही ढंग से नहीं करने पर ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) की निंदा की थी। यूवाईआरबी की स्थापना 1995 में केंद्र द्वारा की गई थी। इसका मुख्य कार्य छह राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौते के अनुसार पानी का वितरण सुनिश्चित करना है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh