नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संकेत दिया कि हरियाणा के एक गांव में दो साल से भी अधिक समय से अनुसूचित जाति (एससी) के सामाजिक बहिष्कार के मामले की जांच का वह आदेश दे सकता है। हैंड पंप से पानी लेने के मुद्दे पर दबंग समुदाय के साथ हुए विवाद के बाद से अनुसूचित जाति का बहिष्कार हो रहा है।

जस्टिस एनवी रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस मामले की जांच के लिए तीन चार अधिकारियों के नाम के साथ तैयार रहें। पीठ ने मेहता से कहा, 'आप हमें कुछ स्वतंत्र अधिकारियों के नाम दीजिए जो इनमें से किसी भी समुदाय से नहीं हों।'

पीठ हरियाणा के हिसार जिले के एक गांव में दो जुलाई, 2017 से एससी का कथित रूप से सामाजिक बहिष्कार किए जाने के मुद्दे पर दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस से सवाल किया कि इस मामले की वह सीबीआइ जांच की मांग क्यों कर रहे हैं। पीठ ने कहा, 'आप सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। इसमें ऐसा क्या है जो आपको मिलेगा? सीबीआइ की जांच का आदेश देने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन आपको इससे क्या हासिल होगा।'

गोंजालविस ने कहा कि राज्य पुलिस ने इस मामले में कुछ नहीं किया है और वह इस सारी प्रक्रिया में दबंग समुदाय का ही पक्ष लेती रही है। मेहता ने कहा कि यह घटना करीब ढाई साल पुरानी है और अब स्थिति शांत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी सीबीआइ जांच के लिए याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीश को घटनास्थल का दौरा करने और तथ्यों का पता लगाने के लिए कहा था। वहां निवासियों ने बताया कि उन्होंने आपस में ही इस विवाद को सुलझा लिया है लेकिन दो व्यक्ति आकर गांव वालों को उकसा रहे हैं।

स्वतंत्र अधिकारियों के नामों के बारे में मेहता ने कहा कि हो सकता है कि न्याय के हित में इसकी जरूरत नहीं हो। पीठ ने उनसे कहा कि आप इन नामों के साथ तैयार रहिए और इसके साथ ही मामले को दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने इससे पहले सारे मामले को 'गंभीर' बताते हुए कहा था कि यह सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न का मामला है और पुलिस को इसमें कार्रवाई करनी होगी।

याचिका में दो जुलाई, 2017 से ही दबंग समुदाय द्वारा किए जा रहे सामाजिक बहिष्कार को खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार को निर्देश देने, सामाजिक बहिष्कार के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देने और प्रभावित परिवारों को समुचित मुआवजा दिलाने का अनुरोध किया गया है। याचिका के अनुसार गांव में अनुसूचित जाति समुदाय के करीब पांच सौ घर हैं और पहले कभी इतने लंबे समय तक सामाजिक बहिष्कार नहीं हुआ है।

Posted By: Nitin Arora

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