नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में आम्रपाली समूह के खिलाफ घर खरीदारों द्वारा दायर सभी मामले आगे की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपने का निर्देश दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दाखिल अर्जी पर अपना निर्देश दिया।

आर्थिक अपराध शाखा ने कहा है कि आम्रपाली समूह के खिलाफ घर खरीदारों द्वारा उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न थानों में मामले दर्ज कराए गए हैं। उसने पूछा था कि जांच के लिए उन्हें एकत्र किया जाए या अलग-अलग जांच की जाए। जस्टिस ललित ने कहा, 'इन मामलों की जांच ईडी को करने दीजिए।'

घर खरीदारों द्वारा कई मामले आम्रपाली समूह के पदाधिकारियों और दिल्ली-एनसीआर में फर्म के खिलाफ दायर किए गए हैं। ये मामले प्रबंधन के समय से फ्लैट सौंपने में चूकने और तय शर्ते पूरी नहीं करने पर दर्ज कराए गए। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने पीठ को बताया कि बहुराष्ट्रीय फर्म जेपी मार्गन से जब्त 187 करोड़ रुपये शीर्ष कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए यूको बैंक एस्क्रो अकाउंट में जमा करा दिए गए हैं।

शीर्ष कोर्ट ने रियल एस्टेट के लिए सरकार पोषित कोष का प्रबंधन करने वाले एसबीआइकैप वेंचर्स को चार अगस्त तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। एसबीआइकैप वेंचर्स की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे ने पीठ को बताया कि उसने आम्रपाली के आठ रुके हुए प्रोजेक्टों की पहचान कर ली है जिसे आर्थिक मदद दी जा सकती है।

घर खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने कहा कि एसबीआइकैप वेंचर्स द्वारा कोट किया गया 12 फीसद ब्याज बहुत ज्यादा है और यह घर खरीदारों पर भारी बोझ होगा। यह आरबीआइ दिशानिर्देश के अनुसार होना चाहिए। साल्वे और कोर्ट की ओर से रिसीवर बनाए गए आर. वेंकटरमानी ने लाहौटी को आश्वासन दिया कि ब्याज दर आरबीआइ दिशानिर्देश के अनुरूप होगी। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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