राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। एम्स में 48 घंटे के अंदर ब्रेन डेड घोषित दो लोगों के अंगदान से सात लोगों को जीवनदान मिला। इसमें से दो मरीजों को लिवर, चार मरीजों को किडनी व एक मरीज को दिल प्रत्यारोपित हुआ। एम्स के डॉक्टरों ने दोनों लिवर, दो किडनी व दिल का प्रत्यारोपण किया। वहीं दो किडनी आरएमएल अस्पताल में भेजी गई। जहां दो मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण हुआ। इसके अलावा अंगदान में मिले चारों कॉर्निया, चार हार्ट वाल्व व हड्डियां सुरक्षित टिश्यू बैंक में रखी गई हैं। इस तरह कई अन्य मरीजों की जिंदगी भी रोशन हो सकेगी।

एम्स ने की दोनों डोनर के परिवार के जज्बे की तारीफ

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दोनों डोनर के परिवार के जज्बे की तारीफ की है। एम्स में भर्ती किसी मरीज का मस्तिष्क काम करना बंद कर दे तो उसे ब्रेन डेड घोषित करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही मरीजों की मौत होने पर नोटिफिकेशन भी जारी किया जाता है। ताकि मरीज की मौत होने पर डॉक्टर व नर्स पीडि़त परिवार के लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें।

काउंसलिंग के बाद परिजनों ने अंगदान की दी स्वीकृति

एम्स के अनुसार 26 वर्षीय सचिन नामक युवक को 13 फरवरी को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था। वह उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला था और मजदूरी करता था। दूसरी मंजिल से गिरने के कारण उसे गंभीर चोट लगी थी। 15 फरवरी को उसे डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। एम्स के ऑर्बो (ऑर्गेन रीट्रिवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन) की प्रभारी डॉ. आरती विज ने कहा कि काउंसलिंग के बाद परिजनों ने अंगदान की स्वीकृति दी। इसके बाद देर रात को दिल, लिवर, किडनी व दोनों कॉर्निया दान की प्रक्रिया पूरी हुई।

परिवार के करीब 30 सदस्यों ने अंगदान की शपथ ले रखी

दिल 21 साल के एक युवक को प्रत्यारोपित किया गया। वहीं एम्स में लिवर 43 वर्षीय पुरुष मरीज को व एक किडनी 30 वर्षीय युवती को प्रत्यारोपित की गई। वहीं दूसरी किडनी आरएमएल में 34 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित की गई। वहीं 17 फरवरी की रात 61 वर्षीय अनिल मित्तल ने अंगदान किया। अनिल मित्तल का परिवार अंगदान के प्रति जागरूक है। परिवार के करीब 30 सदस्यों ने अंगदान की शपथ ले रखी है। अनिल मित्तल ने भी दधीचि देहदान समिति में अंगदान के लिए पंजीकरण कराया था। इसलिए उनके ब्रेन डेड होने पर परिवार के लोगों ने उनका हृदय, फेफड़ा, लिवर, दोनों किडनी, कॉर्निया व हड्डी दान की स्वीकृति दी। लेकिन हृदय व फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए योग्य नहीं पाया गया। इसलिए लिवर व एक किडनी अलग-अलग दो मरीजों को एम्स में प्रत्यारोपित किए गए।

हिंदू की किडनी से मुस्लिम नवयुवक को मिली जिंदगी

एम्स में अंगदान से सांप्रदायिक सौहार्द की बेहतरीन मिसाल पेश की। आरएमएल अस्पताल के नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु महापात्रा ने बताया कि एम्स में जिस बुजुर्ग ने अंगदान किया उनकी एक किडनी आरएमएल में 17 वर्षीय नवयुवक को प्रत्यारोपित किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में खास बात यह है कि डोनर हिंदू हैं, जबकि जिस मरीज को किडनी प्रत्यारोपण हुआ वह मुस्लिम है।

किडनी प्रत्यारोपण से नया जीवन मिला 

उन्होंने कहा कि यह नवयुवक टाइप-1 मधुमेह से पीडि़त है। इस वजह से उसकी किडनी खराब हो गई और आंख की रोशनी भी जा चुकी है। वह उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला है। वह लंबे समय से डायलिसिस पर था। तीन साल से आरएमएल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। किडनी प्रत्यारोपण से उसे नया जीवन मिला है।

Posted By: Bhupendra Singh

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