नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निर्भया के दोषियों के नाम डेथ वारंट जारी होने के साथ ही जेल प्रशासन के लिए तिहाड़ जेल संख्या 3 महत्वपूर्ण बन गया है। यहां के सभी जेलों में जेल संख्या तीन ही है, जिसमें दोषियों को फंदे पर लटकाया जाता है। इस जेल में एक खुले अहाते में ही फांसी घर बना हुआ है। नवंबर में जेल प्रशासन की ओर से निर्भया के दोषियों के नाम जारी नोटिस के बाद से ही फांसी घर में हलचल शुरू हो गई थी।

फांसी का हो रहा है ट्रायल

यहां सिविल से जुड़े कार्य को अंतिम रूप पहले ही दिया जा चुका है। दिसंबर में यहां कई बार फांसी का ट्रायल भी किया गया। इस दौरान डमी को लटकाया गया। अब डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी की प्रक्रिया का ट्रायल एक बार फिर से शुरू किया जाएगा। जेल अधिकारियों का कहना है कि 2013 में आतंकी अफजल को फांसी होने के बाद से यह फांसी घर नवंबर 2019 तक बंद था।

एक साथ लटकाए जाएंगे चारों दोषी

फांसी घर जमीन से 12 फीट ऊपर चारदीवारी से घिरा एक कुएं के आकार का ढांचा होता है, जिसके ऊपर कंक्रीट की छत बनी होती है। छत के बीच के हिस्से में 12-12 फीट लंबा दो तख्त होता है। छत के दोनों ओर लोहे के दो खंभे होते हैं, जो लोहे की एक पाइप से जुड़ी होती है। इसी पाइप पर फंदा बनाया जाता है। इसके किनारे एक लीवर लगा होता है, जिसे दबाने से दोनों तख्त एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और जिस व्यक्ति को फंदा लगाया जाता है, वह छत के नीचे लटक जाता है।

फांसी घर की संरचना में फेरबदल

जेल सूत्रों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की ओर से फांसी घर में बने तमाम ढांचों को दुरुस्त कर दिया गया है। यूं तो फांसी घर में एक बार दो दोषियों को फंदे पर लटकाने का इंतजाम है, लेकिन निर्भया के चार दोषियों को देखते हुए फांसी घर की संरचना में फेरबदल किया गया है, ताकि एक साथ चारों को लटकाया जा सके।

 

Edited By: Arun Kumar Singh