जागरण संवाददाता, नोएडा Weather Upadte:  देश में इस बार मानसून बारिश करीब दो फीसद कम होने की आशंका है। गत वर्ष 95 फीसद बारिश हुई थी, इस बार 93 फीसद बारिश का अनुमान है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट वेदर ने मंगलवार को नोएडा में प्रेसवार्ता के दौरान दावा किया कि भारत में चार जून से मानसून दस्तक दे देगा। स्काइमेट वेदर के अनुसार चालू वर्ष में मानसून देश के सभी चारों क्षेत्रों में कमजोर देखने को मिलेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य भारत में कम बारिश होगी, जबकि उत्तर पश्चिम और दक्षिण भारत में मानसून सामान्य रहेगा।

स्काइमेट वेदर के वाइस प्रेसिडेंट व मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि चालू वर्ष में 93 फीसद वर्षा के साथ कम बारिश होगी। जून से सितंबर की अवधि में दीर्घावधि औसत 887 मिलीमीटर वर्षा में पांच फीसद कम-ज्यादा का आंशिक फेरबदल हो सकता है। मानसून अपने निर्धारित समय पर भारत में दस्तक देगा। भारतीय उप-महाद्वीप में आगमन के समय मानसून कमजोर रहेगा। चूंकि भारत में सबसे पहले मानसून अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह क्षेत्र में आता है।

जहां आमतौर पर 20 मई को मानसून दस्तक देता है। इस बार क्षेत्र में 22 मई को मानसून आने की संभावना है। इसमें दो दिन आगे-पीछे हो सकता है। केरल में मानसून चार जून को दस्तक दे सकता है। इसमें भी दो दिन का आंशिक बदलाव संभव है। इसी दौरान पूर्वात्तर में भारत के भागों में मानसून आएगा। इसके आगमन से पहले केरल में प्री-मानसून वर्षा होती रहेगी।

कब कहां पहुंचेगा मानसून
मानसून चार जून को केरल पहुंच सकता है। इससे पहले 22 मई को मानसून अंडमान निकोबार पहुंचेगा। ओडिशा में मानसून 10 जून को दस्तक दे सकता है। दिल्ली-एनसीआर में इसके 29 जून को पहुंचने की संभावना है। स्काइमेट वेदर के मुताबिक, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में मानसून सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना कम है। जून में मानसून की कमजोर शुरुआत रह सकती है। मानसून के दूसरे हिस्से में बारिश अच्छी हो सकती है। सितंबर के मुकाबले अगस्त में अच्छी बारिश हो सकती हैं।

कई राज्यों में कम बारिश का अनुमान
स्काइमेट वेदर के अनुसार महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाडा, कर्नाटक, रायल सीमा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की आशंका है। पिछले साल भी कई राज्यों में मानसून बारिश सामान्य से कम हुई थी, जिससे महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा और कर्नाटक के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बने थे। इस वर्ष पूर्वी भारत में सामान्य के मुकाबले 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ में इस साल मानसून सामान्य रह सकता है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में अच्छी बारिश के अनुमान जताए जा रहे हैं।

देश के चार प्रमुख क्षेत्रों में मानसून वर्षा की संभावना इस प्रकार है:

पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में
पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में एलपीए की 92 फीसद वर्षा का अनुमान। (जून-सितंबर में एलपीए 1438 मिलीलीटर)
- 5 फीसद संभावना अत्यधिक बारिश की है
- 10 फीसद संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है
- 25 फीसद संभावना सामान्य बारिश की है
- 50 फीसद संभावना सामान्य से कम बारिश की है
- 10 फीसद संभावना सूखे की है

उत्तर पश्चिम भारत में
उत्तर पश्चिम भारत में एलपीए की 96 फीसद वर्षा का अनुमान। (जून-सितंबर में एलपीए 615 मिलीलीटर)
-10 फीसद संभावना अत्यधिक बारिश की है
- 10 फीसद संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है
- 60 फीसद संभावना सामान्य बारिश की है
- 15 फीसद संभावना सामान्य से कम बारिश की है - 5 फीसद सभांवना सूखे की है

मध्य भारत में
-मध्य भारत में एलपीए की 91 फीसद वर्षा का अनुमान। (जून-सितंबर में एलपीए 976 मिलीलीटर)
-5 फीसद संभावना अत्यधिक बारिश की है
- 5 फीसद संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है
- 20 फीसद संभावना सामान्य बारिश की है
- 50 फीसद संभावना सामान्य से कम बारिश की है
- 20 फीसद संभावना सूखे की है

दक्षिण भारत में 
-दक्षिण भारत में एलपीए की 95 फीसद वर्षा का अनुमान। (जून-सितंबर में एलपीए 716 मिलीलीटर)
-5 फीसद संभावना अत्यधिक बारिश की है
-10 फीसद संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है
-60 फीसद संभावना सामान्य बारिश की है
-15 फीसद सामान्य से कम बारिश की है
-10 फीसद संभावना सूखे की है

मानसून जून से सितंबर में बारिश की संभावना इस प्रकार है
- 0 फीसद संभावना अत्यधिक बारिश की है (मानसून सीजन में एलपीए के मुकाबले 110 फीसद से अधिक वर्षा)
- 0 फीसद संभावना सामान्य से अधिक बारिश की है (मानसून सीजन में एलपीए के मुकाबले 105-110 फीसद वर्षा)
- 30 फीसद संभावना सामान्य बारिश की है (मानसून सीजन में एलपीए के मुकाबले 96-104 फीसद वर्षा)
- 55 फीसद संभावना सामान्य से कम बारिश की है (मानसून सीजन में एलपीए के मुकाबले 90-95 फीसद वर्षा)
- 15 फीसद संभावना सूखे की है (मानसून सीजन में एलपीए के मुकाबले 90 फीसद से कम वर्षा)

क्या है एलपीए
1951 से 2000 के बीच हुई कुल बारिश के औसत को दीर्घकालिक औसत (एलपीए) कहा जाता है और यह 89 सेंमी. है। इस बार दीर्घकालिक औसत (एलपीए) 93 फीसदी रहने की संभावना है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो यह लगातार दूसरा वर्ष होगा, जब सामान्य से कम बारिश होगी।

कम बारिश के लिए अल-नीनो जिम्मेदार
स्काइमेट ने संभावित सामान्य से कम बारिश के पीछे अल-नीनो को जिम्मेदार ठहराया है। स्काइमेट के अध्यक्ष जेपी शर्मा ने बताया कि अल-नीनो का मानसून पर प्रभाव पड़ता है। इसके चलते प्रशांत महासागर औसत से अधिक गर्म हो गया है। मार्च-मई के दौरान अल-नीनो की 80 फीसद संभावना है, जो जून से अगस्त तक 60 फीसद तक कम होती है। अल-नीनो के प्रभाव से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म हो जाती है, इससे हवाओं का रास्ते और रफ्तार में परिवर्तन आता है। जिसके चलते मौसम चक्रप्रभावित होता है।

सामान्य से कम बारिश होने की आशंका
स्काइमेट वेदर के महेश पलावत ने बताया इस वर्ष मानसून की पहली वर्षा में सूखा पड़ने की आशंका 15 फीसद है। सामान्य से कम बारिश होने की आशंका 55 फीसद। सामान्य मानसून रहने की संभावना 30 फीसद है। अल-नीनो की वजह से मानसून औसत से कम रहेगा, बल्कि मध्य व दक्षिण भारत के हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी। मध्य प्रदेश, विदर्भ व दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में तापमान अभी से 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, जो यहां के सामान्य तापमान से चार से पांच डिग्री तक ज्यादा है।

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Posted By: Mangal Yadav

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