नई दिल्ली, रायटर। मौसम वैज्ञानिकोंं का कहना है कि इस बार मानसून मजबूत रहेगा, इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि अल नीनो की संभावना के कारण मानसून कमजोर रह सकता है। एशिया के तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था भारत के लिए मानसून की मजबूती अत्यंत आवश्यक है।

अच्‍छी खेती के लिए मजबूत मानसून ज्‍यादा आवश्‍यक
देश के वरिष्ठ मौसम अधिकारी ने कहा कि भारत की 2.6 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था कृषि पर ज्यादा आधारित है इसलिए अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए मजबूत मानसून का होना अत्यावश्यक है। अधिकारी ने बताया कि देश के दक्षिणी भाग केरल में मानसून एक जून तक पहुंच जाएगा और राजस्थान समेत देश के कई भागों में सितंबर तक झमाझम बारिश कर सकता है।

26 करोड़ से ज्‍यादा किसानों को बारिश का इंतजार
देश के 26 करोड़ से ज्यादा किसान चावल, गन्ना, मक्का,कपास तथा सोयाबीन जैसी फसलों के लिए अच्छी बारिश का इंतजार करते हैं। देश की लगभग आधी कृषि भूमि परंपरागत सिंचाई साधनों से वंचित है, इसलिए वह वर्षा पर ज्यादा आश्रित है।

नहीं दिख रहा अल नीनो का असर
मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने कहा, फिलहाल अभी से यह कहना जल्दबाजी होगा कि मानसून का पैटर्न कैसा होगा, लेकिन यह पक्का है और यह सभी मौसम विशेषज्ञ कह रह हैं कि अल नीनो का असर नहीं दिखाई दे रहा है।

दक्षिणपूर्व एशिया समेत भारत में खराब मानसून की थी संभावना
बता दें कि मजबूत अल नीनो की वजह से आस्ट्रेलिया, दक्षिणपूर्व एशिया समेत भारत में इस वर्ष खराब मानसून के कारण सूखे की संभावना जताई गई थी। 2014 और 2015 में खराब मानसून के कारण देश के कई किसानों ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर ली थी।

96 से लेकर 104 फीसद बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य बारिश की संभावना जताई है। विभाग का अनुमान है कि जून से शुरू होकर चार माह के मानसून के दौरान इस वर्ष 96 से लेकर 104 फीसद बारिश हो सकती है। 2017 और 2018 में 91 फीसद से 95 फीसद के बीच बारिश हुई थी। मौसम विभाग इस वर्ष मानसून के बारे में अधिकृत घोषणा मध्य अप्रैल में करेगा।

Posted By: Prateek Kumar