नई दिल्‍ली (सुधीर कुमार पांडेय)। महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्तियां बताती हैं कि इतिहास बनाने के लिए लंबी उम्र की नहीं, बुलंद हौसले की जरूरत होती है।

पीकर जिनकी लाल शिखाएं

उगल रही सौ लपट दिशाएं।

जिनके सिंहनाद से सहमी

धरती रही अभी तक डोल,

कलम, आज उनकी जय बोल।

यह हौसला तब आता है, जब रगों में देशप्रेम रक्त बनकर दौड़ता है। माथे पर देश की माटी का तिलक लगता है और यह माटी होती है-त्याग की, बलिदान की। वह तिलक, जो हर रणबांकुरे का मस्तक गर्व से ऊंचा कर देता है। इन्‍हीं रणबांकुरों के सम्‍मान में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। दिल्‍ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से विजय मशाल प्रज्ज्वलित करने के साथ समारोहों की शुरुआत 14 जुलाई से हो जाएगी। यह मशाल 11 कस्बों और शहरों से गुजरते हुए अंत में द्रास पहुंचेगी, जहां यह कारगिल वार मेमोरियल में निरंतर जल रही मशाल में मिल जाएगी।

कारगिल शहीद कैप्टन विजयंत थापर (वीर चक्र) के पिता कर्नल (रिटायर्ड) वीएन थापर कहते हैं कि कारगिल अपनी किस्म का पहला युद्ध था। इतनी कठिनाइयां थीं, जिन्हें गिनाया नहीं जा सकता है। बस एक ही चीज थी वह थी- हौसला और बहादुरी। इसी के दम पर जवानों ने देश का मस्तक ऊंचा किया। 24 से 25 साल के लड़कों ने जो वीरता दिखाई, उसे नमन किया जाना चाहिए। इतिहास के इस पन्ने को हमें गर्व से देखना चाहिए। जिस देश में हीरो कम हो जाते हैं, वह पतन की ओर चला जाता है। इसलिए हमें अपने हीरो को याद रखना चाहिए।

सुबह जब ईश्वर की प्रार्थना करें तो इन हीरों को भी याद करें। कारगिल युद्ध स्प्रिट के लिए जाना जाता है। जवानों के अंदर जज्बा था, वह देश के लिए कुछ भी कर सकते थे। मेरा बेटा भी ऐसा ही था। कारगिल युद्ध के समय उसके अगर प्रभु ने अगले जन्म में इंसान बनाया तो मैं फिर भी भारतीय सेना ज्वाइन करूंगा और दुश्मनों से लड़ूंगा। इनसे सीखना है।

आने वाली पीढ़ियां गर्व करें उन पर। यह समय उन्हें भी याद करने का है, जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया। मैं अभी 2 राजपूताना राइफल्स में गया था। वहां मैंने ऐसे लोगों को अभी भी देखा, जिनके अंगों में गोलियां व शेल के टुकड़े धंसे हैं। उन वीर नारियों को लोगों को प्रणाम करना चाहिए, जिन्होंने कम उम्र में अपने जीवनसाथी को खो दिया, जिन्होंने अपने जवान बेटों को खो दिया।

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भारतीय सेना रणबांकुरों को सोशल मीडिया पर भी कर रही है सलाम
भारतीय सेना अपने इन्हीं रणबांकुरों को सलाम कर रही है। ये ऐसे शूरवीर, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से वापस लौटने को विवश कर दिया था। सेना सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर पर ऑपरेशन विजय-महसूस कीजिए नाम से श्रंखला चला रही है। कारगिल में किन मुसीबतों का सामना करने हमारे सैनिकों ने जीत हासिल की, वह वीरगाथा सुना रही है।

आज से बीस साल पहले किन विषम परिस्थितियों से जूझते हुए हमारे जवान आगे बढ़ रहे थे, उसके चित्र सामने ला रही है। इंडियन आर्मी के फेसबुक पर बने पेज को एक करोड़ से अधिक लोग लाइक कर चुके हैं। वहीं ट्विटर पर इसके साठ लाख से अधिक फॉलोवर हैं। भारतीय सेना देशवासियों को यह बताने के साथ महसूस भी करा रही है कि जांबाज को जहां लडऩे के लिए कहा जाता है, वहां वह लड़ता है और जहां लड़ता है वहां जीतता है। मई-जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया कारगिल का युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का उदाहरण भर है, जिस पर हर देशवासी को गर्व है।

संकल्प और बहादुर जवानों के लिए याद किया जाएगा कारगिल यु़द्ध
देश गौरव, प्रतिष्ठा और प्रेरणा के साथ ऑपरेशन विजय जिसे कारगिल युद्ध के रूप में भी जाना जाता है, उसकी इस वर्ष 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऑपरेशन विजय खुद पर संयम रखकर युद्ध को कारगिल-सियाचिन क्षेत्रों तक सीमित रखने तथा तीनों सेनाओं की रणनीति और योजनाओं को तेजी से निष्पादित करने के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

कारगिल युद्ध हमेशा संकल्प और बहादुर जवानों के साहस के लिए भी याद रखा जाएगा। इस वर्ष ऑपरेशन विजय की 20वीं वर्षगांठ स्मरण, आनंद और दोहराने की विषय वस्तु के साथ मनाई जा रही है। कारगिल विजय दिवस का मुख्य समारोह 25-27 जुलाई तक मनाया जाएगा और इसका आयोजन द्रास तथा नई दिल्ली में किया जाएगा। इसके अलावा कई कार्यक्रम देश भर में जुलाई के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाएंगे।

कंक्रीट बंकर में थे घुसपैठिये
सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि पाकिस्तानी घुसपैठियों को नियंत्रण रेखा के साथ कई ऊंची चोटियों पर देखा गया था, जहां से अवरोध पैदा किया जा सकता था।

ये घुसपैठिये कंक्रीट के बंकरों और संगारों में थे। इन्हें निकालने की कार्रवाई की गई। इन घुसपैठियों को क्या मालूम था कि भारतीय सेना कदम पीछे नहीं खीचती है। सैनिक, जब किसी कार्य के लिए प्रतिबद्ध होता है, तो समझौता नहीं कर सकता। यह कर्तव्य और साहस के मानकों के प्रति वचनबद्धता है, राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा है।

कारगिल युद्ध, विजय, युवा अधिकारियों और जवानों के जोशीले नेतृत्व, साहस और त्याग के उल्लेख के बिना पूरा नहीं हो सकता। सामान्य परिस्थितियों में असंभव दिखने वाले कार्य, हमारे असाधारण वीरता की गाथाएं हैं। कारगिल विजय देश का विजयोत्सव है।

-भारतीय सेना 

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Posted By: Arun Kumar Singh