नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। मोटापा कम करने के लिए बैरियाट्रिक सर्जरी का चलन तेजी से बढ़ा है। इस बीच मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि अब देश में दो ऐसी दवाएं उपलब्ध हो गई हैं जिनका इस्तेमाल मोटापा कम करने में किया जा रहा है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences, New Delhi) में मोटापे के इलाज के लिए हर बुधवार को विशेष क्लीनिक चलता है। इस क्लीनिक में भी डॉक्टर मोटापे से पीड़ित लोगों के इलाज में इस दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वहीं, एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि इन दवाओं से पांच से 10 किलोग्राम तक वजन कम हो सकता है। अमेरिका व कुछ देशों में और भी नई दवाएं इस्तेमाल हो रही हैं, जो मोटापा कम करने में ज्यादा सक्षम हैं, लेकिन ये दवाएं बहुत महंगी हैं। यदि शरीर का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) 35 से ज्यादा हो तो मोटापे के इलाज के लिए सर्जरी ही बेहतर विकल्प है लेकिन आने वाले समय में मोटापे के इलाज में दवाओं का चलन बढ़ सकता है। एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल कुमार विक्रम ने कहा कि मोटापा खुद बीमारी है, जो हृदय रोग, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, गठिया सहित कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन रहा है। बच्चों में भी मोटापा पहले के मुकाबले दोगुना बढ़ा है। इसके बावजूद अब भी लोगों में जागरूकता का अभाव है।

जीवनशैली व खानपान में सुधार पर अधिक जोर

डॉ. नवल ने कहा कि मोटापा से निजात दिलाने के लिए दो साल से चल रहे विशेष क्लीनिक में अब तक 700 लोगों का इलाज किया गया है। मरीजों की जांच के बाद उन्हें जीवनशैली में सुधार करने की सलाह व डाइट चार्ट दी जाती है। यह डाइट चार्ट हर व्यक्ति की जरूरत, उनकी पंसद और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इसके अलावा मोटापा कम करने वाले व्यायाम कराए जाते हैं। फिर भी यह देखा गया है कि अनेक लोगों में अपेक्षित परिणाम नहीं आ पाता। इसलिए मरीजों को दवा की जरूरत पड़ती है।

एक घंटा व्यायाम जरूरी

एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि मोटापे से बचने के लिए लोगों को प्रतिदिन करीब एक घंटा व्यायाम करना चाहिए। इसके तहत प्रतिदिन 30 मिनट तेजी से पैदल चलना जरूरी है। इसके अलावा खानपान में हरी सब्जियों व प्रोटीन युक्त चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीयूष रंजन ने कहा कि बैरियाट्रिक सर्जरी कराने वाले लोगों को भी ऑपरेशन के बाद खानपान पर नियंत्रण के साथ-साथ पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

बीएमआइ 25 से अधिक होने पर किया जाता है दवा का इस्तेमाल

एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल ने कहा कि दो उपलब्ध दवाओं में से एक-एक गोली (टैबलेट) के रूप में और दूसरी दवा इंजेक्शन के रूप में आती है। यह दवाएं महंगी हैं। बीएमआइ 25 से अधिक होने पर यह दवाएं लेने की सलाह दी जाती है। एक दिन में तीन गोली खाने के साथ लेनी होती है। 10 गोली की कीमत 350 रुपये है। इस तरह महीने का खर्च करीब तीन हजार रुपया है। इंजेक्शन का महीने भर का खर्च करीब 22 हजार है, जबकि इसका इस्तेमाल लंबे समय तक करना होता है। दवा महंगी होने के कारण इसका इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता। यह देखा गया है कि इस दवा से 30 से 40 फीसद लोगों में 10 किलोग्राम या उससे थोड़ा ज्यादा वजन कम हो जाता है।

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