जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सीबीआइ (केंद्रीय जांच ब्यूरो) रिश्वत मामले में राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने आरोपपत्र पर सुनवाई के दौरान जांच पर नाराजगी जताई। कहा कि इस मामले में बड़ी भूमिका वाले लोग खुले में क्यों रह रहे हैं। जांच एजेंसी ने तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और तत्कालीन डीएसपी देवेंद्र कुमार को आरोपपत्र के कॉलम नंबर 12 में रखा है, यानी उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं हैं।

विशेष अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के लिए सुनवाई 19 फरवरी तक टाल दी है। मामले की जांच कर रही सीबीआइ ने मंगलवार को आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें दुबई के कारोबारी मनोज प्रसाद को ही आरोपित बनाया गया है, जबकि सीबीआइ के तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, रॉ प्रमुख एसके गोयल और सीबीआइ के तत्कालीन डीएसपी देवेंद्र कुमार के खिलाफ कोई साक्ष्य जांच में नहीं मिलने की बात कही है।

अक्टूबर 2018 में सीबीआइ ने अस्थाना के खिलाफ रिश्वत लेने का केस दर्ज किया था। अस्थाना पर मनी लांडिंग के एक मामले में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने का आरोप लगा था। हैदराबाद के सतीश बाबू सना की शिकायत के बाद राकेश अस्थाना, देवेंद्र और दो अन्य बिचौलिये मनोज प्रसाद और सोमेश्वर प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

आरोप था कि दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच कम से कम पांच बार रिश्वत ली गई थी। यह विवाद इतना बढ़ गया था कि राकेश अस्थाना ने तत्कालीन सीबीआइ डायरेक्टर आलोक वर्मा पर रिश्वत का आरोप लगाया था। अंत में आलोक वर्मा को सीबीआइ डायरेक्टर पद से हटा दिया गया था।

CBI डायरेक्टर पर अनियमितता का आरोप

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) के डायरेक्टर और मध्य प्रदेश के 1984 बैच के आइपीएस अधिकारी ऋषि कुमार शुक्ला 80 अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवादों में आ गए हैं। सीबीआइ के दिल्ली मुख्यालय में पदस्थ उनके मातहत डीएसपी एनपी मिश्रा ने शुक्ला पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए पीएमओ में शिकायत की है। मिश्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की है। याचिका की 21 अप्रैल को सुनवाई होगी।

Posted By: Shashank Pandey

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