राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। बुढ़ापे में शरीर कमजोर हो जाए तो हल्का झटका लगने पर भी खुद को संभाल पाना मुश्किल होता है। बुजुर्गों का कूल्हा फ्रैक्चर होने की घटनाओं में सबसे बड़ी वजह उनका अचानक गिरना ही है। इसे देखते हुए एम्स के ऑर्थोपेडिक विभाग ने एक खास लैब तैयार की है, जिसे ‘साथी’ (सेव द हिप इनिशिएटिव) नाम दिया गया है। मंगलवार को एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस लैब का शुभारंभ किया। यहां एम्स के विशेषज्ञ बुजुर्गों के गिरने के जोखिम की पहचान कर उन्हें शरीर का संतुलन बनाने के गुर सिखाएंगे। इसका मकसद बुजुर्गों को गिरने से बचाने के साथ ही उनका कूल्हा फ्रैक्चर होने से बचाना है।

एम्स के ऑर्थोपेडिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश मल्होत्रा ने बताया कि बुढ़ापे में गिरने के कई जोखिम भरे कारण होते हैं। इसमें बीमारियों के कारण ज्यादा दवाएं चलना, आंखों से कम दिखाई देना और न्यूरो से संबंधित परेशानी की वजह से उनके गिरने का जोखिम अधिक रहता है। 80 वर्ष से अधिक उम्र वाले 50 फीसद बुजुर्ग साल में कम से कम एक बार जरूर गिरते हैं। इससे करीब 20 फीसद बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है। वहीं 10 फीसद बुजुर्गों को फ्रैक्चर हो जाता है। कई लोगों को ब्रेन में चोट आ जाती है। इसे देखते हुए एम्स के आर्थोपेडिक विभाग ने ‘साथी’ की शुरुआत की है। ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को शरीर का संतुलन बनाने और गिरने से बचने के गुर सिखाए जा सकें।

डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि इस लैब में करीब एक दर्जन मशीनें व उपकरण लगाए गए हैं। इनसे बुजुर्गों के गिरने के जोखिम की जांच की जाएगी और उनका इलाज किया जाएगा। गिरने के जोखिम की पहचान के लिए कई तरह की जांच की जाती है। मसलन मरीज को कुर्सी से खड़ाकर 600 मीटर पैदल चला कर वापस कुर्सी पर बैठने के लिए कहा जाता है। इसमें लगने वाले समय से गिरने के जोखिम का पता लगाया जाता है। इसके अलावा लैब में बैलेंस मास्टर मशीन लगाई गई है, जिससे बुजुर्ग के शरीर के संतुलन की जांच की जाती है। इसके बाद मरीज को आठ सप्ताह तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए फिजियो बॉल, ट्रैपलिन सहित कई उपकरण हैं, इसके माध्यम से वे संतुलन बनाना सीख सकेंगे। बैलेंस मास्टर पर भी एक बॉल लगी है, जिसे एक जगह खड़े होकर मारना होता है। 65 साल से अधिक उम्र के लोगों का ही यहां उपचार किया जाएगा। इसमें जो लोग एक या एक से अधिक बार गिर चुके हैं, उन्हें प्रशिक्षण में प्राथमिकता दी जाएगी।

Posted By: Sanjay Pokhriyal