नई दिल्ली, विनीत त्रिपाठी। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआइएडीएमके) की पूर्व महासचिव शशिकला के करीबी सुकाश उर्फ सुकेश चंद्रशेखर को कई बार जमानत देने के मामले में प्राथमिक जांच के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडीजे) विरेंद्र कुमार गोयल को निलंबित कर दिया है। हाई कोर्ट प्रशासन अब एडीजे गोयल पर लगे आरोपों पर आगे की जांच करेगा।

सुकेश एआइएडीएमके का चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए एक करोड़ 30 लाख रुपये की रिश्वत देने के चर्चित मामले में मुख्य आरोपित है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने सुकेश को होटल हयात से गिरफ्तार किया था। सुकेश निर्वाचन आयोग में लंबित चुनाव चिह्न के मामले में एआइएडीएमके के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरन के संपर्क था। सुकेश के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने अलग-अलग मामले में कई एफआइआर दर्ज की थी। इनमें एक एफआइआर पर तीस हजारी अदालत के निलंबित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र कुमार गोयल की अदालत में सुनवाई चल रही थी। दूसरी एफआइआर पर तीस हजारी की दूसरी अदालत में सुनवाई चल रही थी।

आरोप है कि विरेंद्र कुमार गोयल ने सुकेश को 5 जुलाई 2019 को पत्नी के इलाज के लिए रुपये जुटाने समेत अन्य आधार पर जमानत दी थी। इसके बाद अलग-अलग तारीख पर उनकी छह बार जमानत को बढ़ाया गया। वहीं दूसरे मामले में सुनवाई कर रही अदालत ने सुकेश को पेश करने के संबंध में कई बार आदेश जारी किया, लेकिन पुलिस ने हर बार अदालत को यही बताया कि सुकेश जमानत पर बाहर है। बार-बार आदेश होने पर भी सुकेश के पेश नहीं होने पर अदालत ने हाई कोर्ट को इसका संज्ञान लेने के लिए पत्र लिखा।

प्राथमिक जांच के बाद हाई कोर्ट ने किया निलंबित

निचली अदालत से मिले शिकायत पत्र पर न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने मामले में गड़बड़ी का अंदेशा जताते हुए इसे मुख्य न्यायमूर्ति को भेज दिया। मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल के आदेश पर हाई कोर्ट की सतर्कता समिति ने मामले की प्राथमिक जांच की। इसके बाद मुख्य न्यायमूर्ति ने एडीजे विरेंद्र कुमार गोयल को निलंबित कर दिया। गोयल जल्द ही सेवानिवृत्ति भी होने वाले हैं।

यह है मामला

एआइएडीएमके का चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के मामला वर्ष 2017 में सामने आया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले में शशिकला के करीबी सुकेश चंद्रशेखर के अलावा एआइएडीएमके के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरन, मल्लिकार्जुन समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश रचना), 201 (साक्ष्यों को नष्ट करना) तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मामले में दिल्ली पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है और उक्त धाराओं में आरोपितों पर अदालत द्वारा आरोप तय भी किया जा चुका है।

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