नई दिल्ली [गौतम कुमार मिश्र]। निर्भया के दरिंदों की फांसी भले ही अगले आदेश तक टल गई हो, लेकिन शुक्रवार को सुबह से लेकर शाम तक फांसी का ट्रायल चलता रहा, जिससे सभी यह मान रहे थे कि शनिवार को दोषियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा। वहीं, फांसी के डमी ट्रायल के दौरान मेरठ से आए जल्लाद एक अन्य बात जिसे लेकर उसने जेल अधिकारियों से सवाल पूछे वह रंगा और बिल्ला की फांसी से जुड़ा था। दरअसल, वर्ष 1982 में संजय-गीता चोपड़ा की हत्या में रंगा-बिल्ला को तिहाड़ जेल में ही फांसी दी गई थी। इस दौरान बिल्ला की तत्काल मौत हो गई, लेकिन रंगा दो घंटे तक जिंदा रहा था। यह जानकारी  जल्लाद पवन ने अधिकारियों से ली।

जल्लाद ने समझी अधिकारियों से फांसी लटकाने की पूरी प्रक्रिया 

जल्लाद द्वारा फांसी की प्रक्रिया के ट्रायल के दौरान उसने अधिकारियों से फांसी पर लटकाने की पूरी प्रक्रिया की बारीकियों को समझने की कोशिश की। सूत्रों की मानें तो उसकी सबसे अधिक दिलचस्पी यह जानने में थी कि वह कैसे समझेगा कि उसे कब लीवर खींचना है। उसने जेल अधीक्षक से पूछा कि क्या कोई खास इशारा किया जाएगा। इस पर जेल अधिकारियों ने बताया कि उसे हाथ हिलाकर जेल अधिकारी निर्देश देंगे कि वह लीवर खींचे। उसने यह भी पूछा कि यदि फांसी घर के प्लेटफार्म तक पहुंचने के दौरान दोषी यदि हंगामा करे तो क्या करना होगा।  तमाम तरह के सवालों का जवाब जानने के बाद उसने कहा कि ट्रायल के दौरान अब वह फांसी से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को समझ चुका है। 

अगले आदेश तक टली फांसी

जेल संख्या तीन में फांसी पर लटकाने के ट्रायल की पूरी प्रक्रिया के खत्म होने के कुछ समय बाद देर शाम जल्लाद को बताया गया कि अब दोषियों को फांसी पर लटकाने की कार्रवाई को अगले आदेश तक टाल दिया गया है। इस पर उसने जेल अधिकारियों को कहा कि अगली बार जब भी फांसी की तारीख पर दोषियों की लटकाने की तारीख तय हो, उसे इसकी जानकारी समय पर मिल जाए ताकि वह भी समय से पहुंच कर फांसी की तैयारी में जुट जाए।

फंदा भी बनाया

जेल सूत्रों का कहना है कि ट्रायल के दौरान जल्लाद ने बक्सर से मंगाई गई मनीला रस्सी से चारों कैदियों के लिए फंदा बनाया। इससे पहले रस्सी को पके केले व मक्खन से मुलायम बनाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। ट्रायल के दौरान जल्लाद की भरसक कोशिश रही कि चार पुतलों को लटकाने के लिए जिन दो अलग-अलग लीवरों को दबाना होता है, उसे वह चंद सेकेंड में ही पूरा कर ले। उसने दोनों लीवरों को एक साथ दबाने की भी कोशिश की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाया। बाद में जेल प्रशासन का एक कर्मचारी लीवर दबाने में उसकी मदद करने में जुट गया। पूरी प्रक्रिया में जेल के कुछ कर्मचारी जल्लाद के साथ रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर इनकी भी मदद ले सकें।

मेरठ लौट गया जल्लाद !

फांसी टलने के आदेश को देखते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से जल्लाद को बता दिया गया था कि अब उसे दोबारा बुलाया जाएगा। उम्मीद है कि शनिवार को वह घर रवाना हो गया होगा। जेल प्रशासन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तय भत्ते के हिसाब से उसे तीन दिन का भत्ता देगा। जेल सूत्रों की मानें तो फांसी के लिए जेल प्रशासन द्वारा तय रकम का कुछ हिस्सा एडवांस भी दिया जा सकता है।

Posted By: JP Yadav

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