नई दिल्‍ली, पीटीआइ। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights, NCPCR) ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट की खदानों में काम करने वाली नाबालिग लड़कियों के साथ कथित यौन शोषण के मामले में जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। यही नहीं आयोग ने प्रशासन को इस मामले में जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। आयोग ने राज्‍य के बाल अधिकार आयोग (UPSCPCR) को कहा है कि वह मौका-ए-वारदात पर जाकर वास्‍तव‍िकता का पता लगाए।

एनसीपीसीआर ने ट्वीट कर बताया कि उसने चित्रकूट के ज‍िलाधिकारी से मामले की रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने चित्रकूट के जिला मजिस्ट्रेट से फोन पर बातचीत करके स्थिति का जायजा लिया और सभी बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया। यही नहीं आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर मामले की गंभीरता से जांच करने करके प्राथमिकी दर्ज करने को भी कहा है।

बीते दिनों एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चित्रकूट की खदानों में काम करने को मजबूर गरीब परिवारों की नाबालिग लड़कियों का कथित रूप से यौन शोषण किया जाता है। आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिले की अन्य खदानों में भी बाल अधिकार उल्‍लंघन की संभावित घटनाओं को देखते हुए आयोग ने जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि वह सभी खदानों की जांच कर आयोग को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपे।

बच्‍चों के अध‍िकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ 'सेव द चिल्‍ड्रेन' ने कहा है कि बच्चों और उनके परिजनों को ना केवल आर्थिक मदद देने की जरूरत है वरन इन लड़कियों के लिए मनोवैज्ञानिक देखभाल की भी दरकार है जिन्‍होंने दुर्व्यवहारों का सबसे बुरा अनुभव किया है। बता दें कि इस मामले का दिल्ली महिला आयोग (Delhi Commission For Women) ने संज्ञान लिया है और यूपी सरकार से इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। स्वाति मालीवाल ने प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए लिखा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि बच्चियों का यौन शोषण हो रहा है और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है।

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