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NCERT का विजन 2047: प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट बेस्ड होगी विज्ञान की पढ़ाई, रट्टाफिकेशन होगा खत्म

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:00 PM (IST)

एनसीईआरटी विज्ञान शिक्षा में बड़ा बदलाव ला रहा है, जिसमें रट्टाफिकेशन खत्म कर प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट-आधारित पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा।

प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट बेस्ड होगी विज्ञान की पढ़ाई।

 प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट बेस्ड होगी विज्ञान की पढ़ाई।

HighLights

  1. विज्ञान की पढ़ाई में रट्टाफिकेशन खत्म कर प्रैक्टिकल पर जोर।

  2. एनसीईआरटी मैसूरु में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

  3. 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य हेतु नया पाठ्यक्रम।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। तेजी से बदलती तकनीक और नए-नए शोधों के बीच स्कूलों में होने वाली विज्ञान विषय की पढ़ाई का स्वरूप अब बदलेगा। जिसमें अनुपयोगी या चलन से बाहर हो चुकी विषय वस्तु की जगह ऐसे शोध और नवाचार को शामिल करने की तैयारी है, जो भविष्य में काम आ सके।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इस बदलाव पर चर्चा के लिए 28 से 30 दिसंबर के बीच मैसूरु (कर्नाटक) में एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है। जिसमें विज्ञान विषय की पढ़ाई कराने वाले देश भर शिक्षकों, वैज्ञानिकों और विषय वस्तु तैयार करने वाले विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट बेस्ड होगी पढ़ाई

एनसीईआरटी ने यह पहल तब की है जब विज्ञान को प्रयोगात्मक रूप से समझाने के बजाय अभी भी उसमें समीकरणों और परिभाषाओं को रटाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। साथ ही विज्ञान के कई मूलभूत सिद्धांतों को अभी भी पुराने स्वरूप में ही पढ़ाया जाता है, जबकि हाल ही में हुए शोधों के बाद वह बदल गए है।

एनसीईआरटी ने इस दौरान सम्मेलन की जो थीम रखी है, उसमें विज्ञान विषय की पढ़ाई को शोध व नवाचार आधारित बनाने के साथ उसे 2047 के लक्ष्य को ध्यान रखकर आगे बढ़ने की है। इनमें स्वदेशी विज्ञान, प्राचीन गणित, खगोल विज्ञान, जलवायु परिवर्तन व ग्रीन कैमेस्ट्री जैसी विषयवस्तु को शामिल करने की है।

पढ़ाई की नई-नई तकनीकों व नए-नए तरीकों पर चर्चा

एनसीईआरटी के मुताबिक, इस सम्मेलन में विषयवस्तु पर चर्चा के साथ ही शिक्षकों को विज्ञान की पढ़ाई से जुड़ा प्रशिक्षण देने, विज्ञान विषय की पढ़ाई में नई-नई तकनीकों व नए-नए तरीकों पर चर्चा भी होगी।

साथ ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर विज्ञान की पढ़ाई को लेकर नए सिरे से मंथन, विज्ञान का नया पाठ्यक्रम तैयार करने, नई तरह की टीचिंग-लर्निंग पहल, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग आदि पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन में उद्योगों व नीति निर्धारकों व तकनीकी विशेषज्ञों की बुलाया गया है।

गौरतलब है कि देश के विभिन्न स्कूली बोर्डों से बारहवीं कक्षा में विज्ञान (साइंस) स्ट्रीम से पास होने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2024 में लगभग 61 लाख छात्र पास हुए थे, हालांकि 2013 में यह संख्या करीब 36 लाख ही थी।