विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उपनिषद से महाभारत तक, कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में NCERT ने किन-किन वाक्यों को जोड़ा?

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:00 PM (IST)

एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में 'सत्यमेव जयते' और 'यतो धर्मस्ततो जयः' जैसे भारत के कई संस्थानों के ध्येय वाक्यों को शामिल किया गया है।

एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक जारी।

एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक जारी।

HighLights

  1. एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक जारी।

  2. 'सत्यमेव जयते' और 'यतो धर्मस्ततो जयः' जैसे ध्येय वाक्य जोड़े गए।

  3. ये ध्येय वाक्य उपनिषदों और महाभारत से लिए गए हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'सत्यमेव जयते' और 'यतो धर्मस्ततो जयः' जैसे भारत के कई आधुनिक संस्थानों के ध्येय वाक्यों (मोटो) को कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में जगह मिली है।

इन ध्येय वाक्यों का स्रोत उपनिषदों, महाभारत तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों में है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की यह पाठ्यपुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियांड-पार्ट टू' नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह महीने बाद मंगलवार को जारी की गई। इसका पहला भाग जून में जारी किया गया था।

इस पुस्तक के 'शासन और सार्वजनिक नीति' अध्याय के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय ध्येय वाक्य 'सत्यमेव जयते' मुंडकोपनिषद से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के ध्येय वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' का स्रोत महाभारत में है।

स्वतंत्रता के बाद से ही भारतीय संस्थानों ने शासन के पारंपरिक विचारों और मूल्यों को अपनाना जारी रखा है तथा उन्हें आधुनिक लोकतंत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला है।

उदाहरण के लिए, ब्रिटिश काल के 'आर्डर आफ द स्टार आफ इंडिया' का ध्येय वाक्य 'हेवंस लाइट, आवर गाइड' (स्वर्ग का प्रकाश हमारा मार्गदर्शक है) था, लेकिन आजादी के बाद हमने मुंडकोपनिषद से 'सत्यमेव जयते' (सत्य की ही विजय होती है) को अपने राष्ट्रीय ध्येय वाक्य के रूप में अपनाया है।'

पुस्तक के अनुसार, "यह सार्वजनिक जीवन में भारतीय नैतिक मूल्यों के सतत महत्व को दर्शाता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जय:' चुना गया था।

यह पंक्ति महाभारत से ली गई है और इसका अर्थ है 'जहां धर्म (सदाचार और कर्तव्य) है, वहीं विजय है'। पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि ये ध्येय वाक्य केवल प्रतीकात्मक या सतही नहीं हैं, बल्कि ये हमारे संस्थानों के मूल मूल्यों और आदर्शों को दर्शाते हैं।

सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार