जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आतंरिक सुरक्षा पर केंद्र और राज्य के बीच बैठक में उपस्थिति मुख्यमंत्रियों ने सुकमा हमले पर निंदा प्रस्ताव पारित किया। राज्य के युवाओं से अपील की कि वे माओवादियों से दूर रहें। निंदा प्रस्ताव में बताया गया कि भारत के संविधान को हिंसा के जरिए उखाड़ फेंकना चाहते हैं माओवादी।

इस मामले में सभी पार्टियों को मिलकर सामना करना होगा। पीएम और होम मिनिस्टर ने कहा कि राज्यों और केंद्र की तरफ से उठाए गए कदमों से नक्सली हिंसा में कमी आई है, लेकिन पीएम ने कहा है कि सुकमा में हुए हमले से साफ हो गया है कि अभी भी नक्सली बड़े हमले करने मे सक्षम हैं।

नक्सली हमलों के बाबत और नक्सलियों का सफाया करने के लिए पीएमओ और एमएचए रणनीति तैयार कर रहा है। एनसीटीसी के मामले में नीतीश और मोदी ने कन्नी काटी है। इन दोनों ने एनसीटीसी की जरूरत पर सवाल उठाया है। वहीं यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने एनसीटीसी पर कुछ साफ न बोलते हुए कहा है कि राज्य का एटीएस आंतकियों से लड़ने के लिए काफी है और अब तक आतंकियों का सफाया करने में कामयाब रहा है।

पूरे सम्मेलन में नक्सली हिंसा का एजेंडा प्रमुखता से रहा। मोदी ने कहा कि देश की सरकार मैच फिक्सिंग को लेकर तो कानून बना सकती है, लेकिन वह आंतकवाद पर कानून नहीं बना सकती।

इस बैठक में पीएम मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ नक्सली हमले को बड़ी हार बताया। इसके साथ देश में नक्सली हमलों में कमी होने की भी जिक्र की। पीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है।

25 मई को छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले के बाद केंद्र देश की आतंरिक सुरक्षा को लेकर सक्रिय हो गया है। पीएम ने राज्यों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बुधवार को बैठक बुलाई थी। बैठक से पहले राज्यों की ओर से विवाद तेज हो गए। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बैठक में शिरकत करने से इन्कार कर दिया था। जयललिता ये पीएम को लिखे अपने पत्र में कहा है कि ऐसी बैठकों में जाकर कोई फायदा नहीं होता क्योंकि यहां राज्यों को बोलने का मौका नहीं मिलता। इसलिए वे इस बैठक का बहिष्कार करती हैं।

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