पणजी, आइएएनएस। जिन देशों की हरकतें हिंद और प्रशांत महासागर में स्वतंत्र, खुले और समावेशी आवागमन के खिलाफ हैं, उन्हें उनकी गलती का एहसास कराया जाना चाहिए। बताया जाना चाहिए कि वे गलत हैं और खुद में सुधार लाएं। जरूरत पड़ने पर भारत उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई भी करेगा। चीन का नाम लिए बगैर नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मबीर सिंह ने यह बात कही है। उन्होंने कहा, यदि कोई देश समुद्र में गलत कार्य करेगा तो उसे मौजूदा स्थिति बदलने से रोका जाएगा। वह गोवा मेरीटाइम कान्क्लेव के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।

विदित हो कि चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश इलाके पर कब्जा कर वहां से होने वाला जहाजों का आवागमन बाधित करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इसे लेकर पूरी दुनिया में चिंता है। कान्क्लेव में रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा कि हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में हो रहा नौसेनाओं का विस्तार सामान्य घटनाक्रम नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि में बड़े कारण छिपे हुए हैं। इससे जुड़े खतरों को नकारा नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा, इस समुद्री क्षेत्र में अभूतपूर्व ढंग से बढ़ रही सैन्य मौजूदगी, आतंकवाद, लुटेरों की गतिविधियों और हथियारों की तस्करी से चुनौतियों में बढ़ोतरी हुई है। मछली पकड़ने की अवैध गतिविधियों और नशीले पदार्थो की तस्करी ने इन चुनौतियों को और बढ़ाया है। इलाके में शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए भारत की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

कान्क्लेव में विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, समुद्र में सैन्य और आतंकी गतिविधियां बढ़ने से समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है। इस स्थिति में हिंद महासागर के हालात हाल के वर्षो में काफी जटिल हुए हैं। बढ़ती अनिश्चितता के दौर में भारत के लिए वहां की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की जरूरत पैदा हो गई है। श्रृंगला ने नई तकनीक वाले दौर में नए तरह का खतरा तेजी से हालात बदल रहा है।

हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकी और दूसरे गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना रविवार से तीन दिवसीय गोवा मेरिटाइम कान्क्लेव का आयोजन कर रही है। कानक्लेव 9 नवंबर तक चलेगा। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इंडीयन ओसियन रिजन (आईओआर) के 12 देशों के नौसेना प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं।

Edited By: Shashank Pandey