नई दिल्ली, एजेंसी। मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले की पानी भरी 'रेट होल' कोयला खदान में नौसेना के गोताखोरों को गुरुवार को एक शव दिखाई दिया। इसके अलावा कई कंकाल भी नजर आए हैं। खदान में एक माह से भी ज्यादा समय से 15 श्रमिक फंसे हुए हैं। गुरुवार को शव व कंकाल दिखने के बाद अब उनके जीवित बचने की उम्मीद बहुत कम है। हालांकि कंकाल व शव की पहचान नहीं होने से अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि ये फंसे श्रमिकों के ही हैं।

पूरा सड़ गया है शव
नौसेना के राहत व बचाव कार्य के प्रवक्ता आर. सुसनगी ने बताया कि एक खनिक का सड़ा हुआ शव खिंचकर मुंहाने तक लाया जा चुका है। हालांकि उसकी पहचान अभी नहीं हुई है और वह इतना गल गया है कि और क्षत-विक्षत हो सकता है। इसलिए उसे अभी बाहर नहीं निकाला गया है।

36वें दिन आरओवी ने खोजे कंकाल
नौसेना के गोताखोरों ने 30 दिसंबर से खोज व बचाव अभियान शुरू किया था। उन्हें हादसे के 36 वें दिन पानी के अंदर इस्तेमाल किए जाने वाले आरओवी (दूर से संचालित किए जाने वाले वाहनों) के जरिए कई कंकाल दिखे। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि क्या वे लापता खनिकों के ही हैं? नौसेना प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने दिल्ली में बताया कि 160 से 201 फीट की गहराई में दिखे एकमात्र शव को निकालने की कार्रवाई में सलाह देने के लिए पहुंची डॉक्टरों की टीम ने कहा कि शव को और न खिंचा जाए, वरना वह टुकड़े-टुकड़े हो सकता है।

खदान में 13 दिसंबर को उतरे थे खनिक
13 दिसंबर को पास की नदी का पानी खदान में घुसा था खदान में कोयले के अवैध खनन के लिए कई मजदूर गए थे। 13 दिसंबर को अचानक पास की एक नदी में बाढ़ आई और उसका पानी खदान में भर गया। इस कारण 15 श्रमिक अंदर फंस गए थे। उनकी खोजबीन व बचाव के लिए देश का संभवत: सबसे बड़ा अभियान शुरू किया गया है। इसमें-नौसेना, एनडीआरएफ, वायु सेना समेत कई एजेंसियों के लोग जुटे हैं। गोताखोर इस बेहद जटिल अभियान को अंजाम दे रहे हैं। कंकाल मिलने के बारे में सूत्रों ने कहा कि खदान के पानी में सल्फर की मात्रा ज्यादा है, इसलिए शव तेजी से स़़डने का खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट ने की थी खिंचाई
खदान में फंसे श्रमिकों को निकालने में लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी को मेघालय सरकार की खिंचाई की थी। कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि फंसे श्रमिकों को सरकार जिंदा या मुर्दा जैसे भी हो निकाले। साथ ही अवैध खनन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने की भी आलोचना की थी।

 

Posted By: Tilak Raj

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