समुद्र में फंसे लोगों की जान बचाना होगा आसान, भारतीय नौसेना अकादमी ने तैयार किए दो स्पेशल ड्रोन
भारतीय नौसेना अकादमी ने लंबी दूरी के समुद्री खोज और बचाव अभियानों के लिए दो मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) विकसित ...और पढ़ें
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समुद्र में बचाव और खोज अभियान में मदद करेंगे नौसेना के दो ड्रोन (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
नौसेना अकादमी ने विकसित किए दो उन्नत बचाव ड्रोन।
क्वाडकाप्टर खोजता है, हेक्साकाप्टर बचाव उपकरण पहुंचाता है।
एआई और जीपीएस तकनीक से लैस, 10 किमी रेंज।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना अकादमी की एक टीम ने लंबी दूरी के समुद्री खोज और बचाव अभियानों के लिए दो मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) को विकसित किया है। इस सिस्टम में दो ड्रोन हैं, जो साथ मिलकर काम करते हैं।
क्वाडकाप्टर पानी में व्यक्ति को खोजता है, और फिर हेक्साकाप्टर उस जगह पर बचाव उपकरण पहुंचाता है। ये दोनों ड्रोन लंबी दूरी के रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन के जरिए जुड़े होते हैं। बतादें कि क्वाडकाप्टर में चार रोटर (मोटर और प्रोपेलर) लगे होते हैं, जबकि हेक्साकाप्टर में छह रोटर होते हैं।
यूएवी बनाने वाली टीम के सदस्य सुधांशु तंवर ने कहा कि क्वाडकाप्टर 2 के आप्टिकल और थर्मल कैमरों की मदद से खोजबीन करता है। योलो नाम का एक एआइ माडल लाइव फीड को स्कैन करता है और पानी में किसी व्यक्ति के होने का पता चलने पर उसे चिह्नित करता है।
जैसे ही किसी व्यक्ति का पता चलता है, हेक्साकाप्टर जीपीएस की मदद से बचाव उपकरण लेकर उस जगह पहुंच जाता है। उपकरण को केवल आपरेटर के कमांड पर ही गिराया जाता है, जिससे अंतिम फैसला लेने का नियंत्रण इंसान के पास रहता है।
बचाव उपकरण वहां गिराने के बाद हेक्साकाप्टर लौट जाता है। क्वाडकाप्टर 45 मिनट तक उड़ सकता है और आधे किलो तक पेलोड ले जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। हेक्साकाप्टर 25 मिनट तक उड़ सकता है और ढाई किलो तक पेलोड ले जा सकता है।
अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रतिघंटा है। दोनों की आपरेटिंग रेंज 10 किलोमीटर है। (समाचार एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)
