मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। देश के जिन कुछ राज्यों में दो माह पहले तक सूखे की मार थी, वहां इन दिनों चारों ओर पानी ही पानी है। सूखे से जुझ रहे लोग अब पानी से परेशान होकर सुरक्षित स्थान की तलाश कर रहे हैं। सूखाग्रस्त राज्यों में सूखे से तो इतने लोगों की मौत नहीं हुई थी जितने लोग बारिश के कहर से अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं। बाढ़ के प्रकोप से अब तक इन राज्यों में अरबों रुपये का नुकसान हो चुका है। जलतड़ाव ने अब तक 250 लोगों की जान भी ले ली है। कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, बिहार जैसे राज्यों में बाढ़ के हालात गंभीर बने हुए हैं। इन राज्यों में अब तक 10 लाख से अधिक लोग राहत शिविरों में पहुंचाए जा चुके हैं। 

बाढ़ से बेहाल राज्यों का हाल जानने के लिए तमाम राजनेता भी अब इन जगहों का हवाई सर्वें करने में लगे हुए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अपने-अपने लोकभा इलाकों में दौरा किया और वहां के हालात देखें। विशेषज्ञों का कहना है कि कम समय में अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ के हालात देखने को मिले हैं। मगर इन सबके बावजूद प्रशासन को इस तरह की स्थिति से निपटने के उपाय पहले ही करने चाहिए थे। बाढ़ और सूखा ये ऐसी प्राकृतिक आपदाएं हैं जो हर साल देश को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाती हैं।

देश के हर भाग में हर साल छोटी-मोटी बाढ़ तो आती ही है जिससे देश को करोड़ों रुपयों का नुकसान होता है। सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार पड़ता है। बादल फटने से लेकर नदियों के मार्ग बदलने से नए-नए इलाकों में बाढ़ आती है। राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के अनुसार देश का लगभग 400 लाख हेक्टेयर इलाका बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हर साल लगभग 76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ आती है। उसकी मात्रा में हर साल इजाफा हो रहा है। औसतन 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल नष्ट होती है। 

देश में कम से कम दस ऐसे क्षेत्र हैं, जहां प्रतिवर्ष बाढ़ का आना तय माना जाता है लेकिन अगर बाढ़ के कारण सारे देश में हाहाकार मचा हो तो इन क्षेत्रों में इस मौसम से कितना विनाश हुआ है इसको ठीक तरह से कल्पना कर पाना भी संभव नहीं है। पिछले कुछ दशकों के दौरान मध्य भारत जैसे क्षेत्र में भी रहने वाले लोग मूसलाधार बारिश और एकाएक बड़ी मात्रा में बारिश होने, बादल फटने की घटनाओं से परेशान हैं। इस साल गुजरात और राजस्थान में आई बाढ़ से अब तक करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है।

गुजरात के मोरबी जिले के कल्याणपुर गांव में 17 बच्चों समेत 42 लोगों को पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पुलिस के एक सिपाही पृथ्वीराज सिंह जडेजा ने अपने दोनों कंधे पर दो बच्चों को बिठाकर बाढ़ के पानी से पार निकाला। उनकी वो तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई रही। पृथ्वीराज सिंह जडेजा की हर तरफ सराहना हो रही है। वीडियो वायरल होने पर मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी उन्हें फोन किया और उनके काम की सराहना की। 

कर्नाटक में भी बाढ़ से लोग परेशान 

कर्नाटक में भी बाढ़ से हालात खराब हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। उस दौरान सीएम बीएस येदियुरप्पा भी उनके साथ थे। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड, उडुपी, चिकमगलुर, गडग, उत्तर कन्नड, रायचुर, यादगिर, बेलगावी, बगलकोट, विजयपुरा व कोडागु जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या 31 हो गई है। 14 लोग अभी भी लापता हैं। सुरक्षा टीमों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। इनमें से 2.18 लोग 924 राहत शिविरों में शरण लिए हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये की मदद की घोषणा की है।

महाराष्ट्र के 10 जिले प्रभावित

इस बार बरसात से महाराष्ट्र के 10 जिले प्रभावित है। यहां के पालघर, रत्नागिरी, रायगढ़ कोल्हापुर, सांगली, सतारा, ठाणो, पुणो, नासिक और सिंधूदुर्ग जिले पिछले एक सप्ताह से जारी भारी बारिश के चलते बाढ़ से जूझ रहे हैं। यहां मरने वालों की संख्या 30 से अधिक पहुंच गई। चार लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। 

केरल में 67 की मौत, लाखों लोग राहत कैंप में 

केरल में भी बरसात से हालात खराब हैं। अब तक यहां 67 लोगों की मौत हो गई है और 2.27 लाख लोग राहत शिविरों में पहुंचाए जा चुके हैं। यहां 8 अगस्त को भूस्खलन में मालाप्पुरम का कवलप्पारा गांव पूरी तरह से खत्म हो गया। गांव के 65 लोग दब गए हैं। 11 लोगों के शव अब तक निकाले गए हैं। बाकी की तलाश की जा रही है। 

राहुल गांधी भी दौरे पर

कर्नाटक में बाढ़ का जायजा लेने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी केरल पहुंचे हैं। उनका संसदीय क्षेत्र वायनाड सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। उन्होंने राहत शिविरों में वायनाड के बाढ़ प्रभावितों का हाल जाना। वह कवलप्पारा गांव भी गए। रेलवे ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल के लिए भेजे जानी वाली राहत सामग्री को टैक्स से छूट दे दी है।

महिलाओं को निकाला तो मिला राखी का तोहफा

बाढ़ प्रभावित कोल्हापुर में महिलाओं ने सुरक्षित निकालने वाले नौसेना के जवानों को राखी बांध कर उनका आभार जताया। ये महिलाएं राजापुर गांव में बरसात के पानी में फंस गई थी। नौसेना के जवानों ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जिसके बाद महिलाओं ने जवानों को राखी बांधी। नौसेना के प्रवक्ता ने राखी बांधती महिलाओं की तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की हैं। कर्नाटक के बेलगावी जिले में रविवार को वायु सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

हर साल आती है प्राकृतिक आपदा मगर स्थायी समाधान नहीं

नदियों में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है जो विश्व के अनेक भागों में करोड़ों रुपयों की संपत्ति को निगल जाती है। गांव के गांव पलक झपकते ही जल-समाधि ले लेते हैं। हरे-भरे खेत, लहलहाती फसलें, बाग, घर-मकान, देखते-देखते पानी की तेज धारा के साथ बह जाते हैं। अनगिनत पेड़-पौधे एवं दुर्लभ वनस्पतियां पानी के तीव्र बहाव के साथ विलीन हो जाते हैं। हजारों व्यक्ति एवं लाखों पशु बाढ़ की भेंट चढ़ जाते हैं। खैर, भारत में बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र ने साल 2018 अक्टूबर में इकोनॉमिक लॉसेज, पॉवर्टी एंड डिजास्टर 1998-2017 नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी, इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 सालों में वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित देशों को 2,908 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ है जिसमें मौसम बदलने के कारण आपदाओं से 2,245 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। इस रिपोर्ट के अनुसार, अकेले भारत को पिछले दो दशकों (1998-2017) में बाढ़ के कारण 547 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। 

बाढ़ से पलायन को मजबूर लोग

राज्यों में एक बड़ी आबादी बाढ़ की वजह से दूसरी जगहों पर पलायन कर जाती है। जब बरसात का कहर खत्म होता है उसके बाद भी वो वहां वापस नहीं लौटना चाहते हैं जबकि जहां गए हुए होते हैं वहीं पर अपना रोजीरोजगार शुरु कर लेते हैं और परिवार पालने लगते हैं। ऐसे में वो वापस लौटकर वहां नहीं जाते हैं। ऐसे में सभी का यही मानना होता है कि बाढ़ कुदरत का प्रकोप है, कोई कितनी भी कोशिश कर लें मगर इसके कहर से बच पाना मुश्किल। बाढ़ पर नियंत्रण कर पाना किसी भी राज्य के लिए आसान नहीं है। बीते 70 सालों में बाढ़ के असर को कम करने के लिए अनेक काम हुए हैं। मगर फिर भी इस समस्या का कोई स्थाई हल नहीं निकाल सका है।

भारत सरकार भी राज्यों की ही तर्ज पर बाढ़ से निपटने या स्थायी निदान के बजाय राहत पर ही जोर देती नजर आ रही है। देश में बाढ़ से हर साल तबाही होती है और इस बाढ़ से जानमाल का नुकसान होता है। भारत तीन ओर से समुद्रों (अरब सागर, हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी) से घिरा है। समूचे देश में ऐसे इलाके हैं, जो कि हर वर्ष बाढ़ का सामना करते हैं। देश में ऐसे कुल इलाकों की संख्या 12.5 प्रतिशत है। 

इन राज्यों में होता है बाढ़ का अधिक असर  

भारत में बंगाल, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, केरल, असम, बिहार, गुजरात, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और पंजाब ऐसे राज्य हैं जिनमें बाढ़ का ज्यादा असर होता है। इस वर्ष तो सूखे के लिए जाना जाने वाला राजस्थान भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। मानसून की होने वाली बहुत अधिक बरसात दक्षिण पश्चिम भारत की नदियां जैसे ब्रहमपुत्र, गंगा, यमुना आदि बाढ़ के साथ इन प्रदेशों के किनारे बसी बहुत बड़ी आबादी के लिए खतरे और विनाश का पर्याय बन जाते हैं। इन सभी बड़ी नदियों के आसपास या किनारों पर बसे शहर, गांव और कस्बे इसका सबसे ज्यादा शिकार बन जाते हैं।

इन नदियों में आता है बाढ़ का पानी  

देश में रावी, यमुना-साहिबी, गंडक, सतलज, गंगा, घग्गर, कोसी तीस्ता, ब्रह्मपुत्र महानदी, महानंदा, दामोदर, गोदावरी, मयूराक्षी, साबरमती और इनकी सहायक नदियों में पानी किनारों को छोड़-छोड़कर बड़ी दूर तक पानी फैल जाता है। राज्य के राज्यवार बाढ़ प्रवृत क्षेत्रों को समझा जा सकता है। ज्यादातर राज्यों में बाढ़ प्रवृत्त इलाका भी इस प्रकार है।

इतने हेक्टेयर एरिया में पड़ता है प्रभाव

विभिन्न राज्यों के बाढ़ से प्रभावित इलाकों का दायरा बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 7.336 लाख हैक्टेयर, बिहार में 4.26 लाख हैक्टेयर, पंजाब में 3.7 लाख हैक्टेयर, राजस्थान में 3.26 लाख हैक्टेयर, असम 3.15 लाख हैक्टेयर, बंगाल 2.65 लाख हैक्टेयर, उड़ीसा का 1.4 लाख हैक्टेयर और आंध्र प्रदेश का 1.39 लाख हैक्टेयर, केरल का 0.87 लाख हैक्टेयर, तमिलनाडु का 0.45 लाख हैक्टेयर, त्रिपुरा 0.33 लाख हैक्टेयर, मध्यप्रदेश का 0.26 लाख हैक्टेयर का क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होता है।

बाढ़ की घटनाओं की ये फेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। इसमें दोनों ही तरह के इलाके हैं। असम जैसे राज्य भी हैं, जहां बाढ़ एक सालाना त्रासदी है, लेकिन कश्मीर, राजस्थान, गुजरात जैसे राज्य भी हैं, जो हाल के वर्षों में भीषण बारिश और बाढ़ के हालात से रूबरू हो रहे हैं। 

गंगा बेसिन का क्षेत्र

अपनी उत्तरी सहायक नदियों की अधिकता के कारण गंगा बेसिन का ज्यादातर क्षेत्र बाढ़ को झेलता है लेकिन इन इलाकों में सर्वाधिक बुरी तरह प्रभावित होने वाले क्षेत्र, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश हैं। गंगा बेसिन के प्रभावित राज्यों में इन बड़ी नदियों की सहायक नदियों जैसे सारदा, राप्ती, गंडक और घाघरा नदियां पूर्वी उत्तरप्रदेश को बाढ़ग्रस्त बनाती हैं। इसी तरह हरियाणा और दिल्ली में बाढ़ का प्रमुख कारण यमुना नदी है। 

ब्रह्मपुत्र और बराक के बेसिन 

जब कभी ब्रह्मपुत्र और बराक बेसिन में अतिरिक्त पानी आ जाता है तो यह अपने साथ तबाही भी लाता है। ये नदियां अपनी सहायक नदियों के साथ उत्तर-पूर्व के राज्यों जैसे बंगाल, असम और सिक्किम में कहर बरपाती हैं। जलदाखा तीस्ता और तोरसा पूर्वी बंगाल में और मणिपुर की नदियों में बाढ़ लाती है और बरसात के दौरान सभी नदियां अपने किनारों को तोड़कर बहने लगती हैं।

मध्य भारत और दक्षिणी नदियों के बेसिन

उड़ीसा में बाढ़ का प्रमुख कारण महानदी, बैतरणी और ब्राह्मणी जैसी नदियां हैं जो इस राज्य में तबाही के लिए जिम्मेदार हैं। इन तीनों नदियों के डेल्टाओं में बहुत अधिक और घनी आबादी निवास करती है। केरल में भी नदियां और समीपवर्ती पहाड़ों से गिरकर बहने वाली नदियां विनाश की लीला लिखती हैं, लेकिन दक्षिणी और मध्य भारत में बाढ़ का प्रमुख कारण नर्मदा, गोदावरी, तापी, कृष्णा और महानदी है जिनमें भारी वर्षा के दौरान पानी बहुत बढ़ जाता है।

गोदावरी के डेल्टाई क्षेत्रों में तूफानी चक्रवात गोदावरी, महानदी और कृष्णा में बाढ़ लाने का काम करते हैं और इनके कारण आंध्र प्रदेश के समुद्र तटीय इलाकों में, उड़ीसा और तमिलनाडु में बाढ़ आती है। अब यह भी जान लीजिए कि बाढ़ इन क्षेत्रों को कितना ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। 

प्रत्येक वर्ष बाढ़ कम से कम 13 अरब 40 करोड़ का नुकसान पहुंचाती है और यह नुकसान 81.11 लाख हैक्टेयर जमीन को प्रभावित करता है। इस बाढ़ के कारण 35.7 लाख हैक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद होती हैं। बाढ़ के प्रकोप से कम से कम 1600 लोगों की मौत होती है और 95 हजार जानवरों की मौत हो जाती है।  

क्या कहते हैं आंकड़े  

गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से पिछले साल सितंबर में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में बाढ़ के कारण 1.09 करोड़ लोग प्रभावित हुए। 850 लोगों को जान गंवानी पड़ी, जिनमें 184 मध्य प्रदेश में, 99 उत्तराखंड में, 93 महाराष्ट्र में 74 उत्तरप्रदेश में और 61 गुजरात में थे।

2004- बिहार के 20 जिलों में 2.10 करोड़ लोग प्रभावित हुए। इस बाढ़ ने 3272 पशुओं और 885 लोगों की बलि ली।

2005- 26 जुलाई को मुंबई में हुई भारी बारिश ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मुंबई में औसतन 242 एमएम बारिश होती है, लेकिन उस दिन 24 घंटे में शहर में 994 एमएम बरसात रिकार्ड की गई। पूरी मुंबई जहां के तहां ठहर गई। लोग 2-2 दिन तक ऑफिस से घर नहीं जा सके। 

2005- इस साल गुजरात ने भी अपने इतिहास की भीषणतम बाढ़ देखी। कम समय में 505 एमएम बारिश के बाद करीब 7200 गांवों में पानी घुस गया और 1.76 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा।

2008- बिहार में 23 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए, जिनमें से 250 तो मौत के मुंह में ही समा गए। कुल 8.4 लाख हेक्टेयर जमीन पूरी तरह धुल गई और 3 लाख मकान क्षतिग्रस्त हो गए। 

2010- लद्दाख में छह विदेशियों सहित 255 लोग बाढ़ की भेंट चढ़ गए।

2012- ब्रह्मपुत्र में आई बाढ़ ने न केवल 60 लोगों को बेघर किया, बल्कि 124 लोगों की जान भी ले ली, साथ ही काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क में 540 जानवर भी काल-कवलित हो गए।

2014- जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ में 280 लोग मारे गए और करीब 400 गांव पूरी तरह डूब गए।

2015- चेन्नई ने पिछले 100 सालों की सबसे भीषण बाढ़ देखी। जब दिसंबर के पहले हफ्ते में हुई करीब 500 एमएम बारिश के बाद पूरा शहर डूब गया। इस बाढ़ से 20,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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Posted By: Vinay Tiwari

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