देशभर की राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए गए 2.10 करोड़ से अधिक मामले, चेक बाउंस से वैवाहिक विवादों तक बनी बात
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में देशभर में 2.10 करोड़ से अधिक मामलों का ...और पढ़ें

तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.1 करोड़ से अधिक मामलों का निपटारा
HighLights
तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने 2.10 करोड़ से अधिक मामले निपटाए।
नालसा ने देशभर में विवादों के समाधान का माहौल बनाया।
लंबित मामलों को कम करने और आपसी सहमति को बढ़ावा मिला।
पीटीआई, नई दिल्ली। देशभर की अदालतों और ट्रिब्यूनल में मुकदमेबाजी के स्थान पर बातचीत और समझौते का माहौल रहा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की।
इसमें आपसी सहमति से 2.10 करोड़ से ज्यादा मामले सुलझाए गए।
नालसा के बयान के अनुसार, 26 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में लोक अदालत की बेंच बनाई गई। इनमें हाई कोर्ट से लेकर तालुका कोर्ट स्तर पर न्यायिक अधिकारी, वकील, पैरा-लीगल वालंटियर और मुकदमा करने वाले शामिल हुए।
शनिवार शाम सात बजे तक के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार (कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली को छोड़कर और कुछ अन्य क्षेत्रों से डेटा आना बाकी है), 2,10,39,112 मामले सुलझाए गए।
बयान में कहा गया है कि इनमें से 1,90,75,743 मामले प्री-लिटिगेशन (मुकदमे से पहले के) थे, जिन्हें सीधे लोक अदालत के सामने लाया गया था, जबकि 19,63,369 मामले पहले से ही अदालतों में लंबित थे। कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली में यह आयोजन 19 सितंबर, 10 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को होना है।
मुख्य न्यायाधीश और नालसा के संरक्षक जस्टिस सूर्य कांत ने लोक अदालत से पहले अपने एक संदेश में कहा कि विवादों को सुलझाने के लिए लोग इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल करें। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह तरीका अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने में मदद करता है।
साथ ही यह दोनों पक्षों को ऐसे नतीजे तक पहुंचने का मौका देता है जो दोनों को मंजूर हो। इससे उन्हें लंबे मुकदमों के खर्च और देरी से बचाया जा सकता है।
जिन विवादों को सुलझाया गया, उनमें चेक बाउंस के मामले, मोटर दुर्घटना के दावे, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, उपभोक्ता शिकायतें, जमीन अधिग्रहण के मामले, उत्तराधिकार से जुड़े विवाद, छोटे कारोबार से जुड़े मध्यस्थता के दावे, समझौता योग्य आपराधिक मामले और ट्रैफिक चालान शामिल थे।
