नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। 2017 के अपराध के आंकड़ों पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में दंगा पीड़ितों की कुल संख्या में 22 फीसद की वृद्धि के साथ औसतन देश में हर दिन दंगों से जुड़े 161 मामले देखे गए। हलांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2016 की तुलना में 2017 में दंगों की घटनाओं में पांच फीसद की कमी आई। ये आंकड़े सिर्फ सांप्रदायिक दंगों के नहीं हैं। इसमें जमीन-जायदाद, जातीय, राजनीतिक, विभिन्न समूहों और छात्रों के बीच होने वाले दंगे भी शामिल हैं। वहीं दुष्कर्म और हत्या के मामलों में भी कमी देखी गई।

बिहार रहा अव्वल

2017 में बिहार में दंगों के 11,698 मामले दर्ज हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में दंगों के 8,990 मामले दर्ज हुए। 7,743 मामलों के साथ महारष्ट्र तीसरे स्थान पर रहा। 2017 में तमिलनाडु में दंगों के 1935 मामले सामने आए। इन दंगों से पीड़ितों की संख्या 18,749 रही। यहां हर दंगे में औसतन 9 लोग पीड़ित हुए। दंगे की कुल घटनाओं में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 3.28 फीसद रही। लेकिन पीड़ितों के मामले राज्य की हिस्सेदारी 21 फीसद रही। इस मामले में पंजाब सबसे शांत राज्य रहा।

कम हुए सांप्रदायिक दंगे

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में सांप्रदायिक दंगों के 869 मामले सामने आए थे, जो 2017 में घटकर 723 रह गए। सांप्रदायिक दंगों के मामले में भी बिहार अव्वल रहा। साल 2017 में बिहार में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक दंगों के 163 मामले सामने आए। इसके बाद कर्नाटक और ओडिशा रहे। जहां क्रमश: 92 और 91 मामले सामने आए। वहीं 2016 में हरियाणा में सांप्रदायिक दंगों के 250 मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2017 में सांप्रदायिक दंगों के सिर्फ 25 मामले सामने आए।

सबसे ज्यादा जमीन जायदाद को लेकर दंगे

2017 में हुए कुल दंगों में 22 फीसद दंगे जमीन जायदाद से जुड़े थे। वहीं दंगा पीड़ित भी 35 फीसद ऐसे थे, जो जमीन जायदाद के विवाद के शिकार हुए थे। जमीन जायदाद के दंगों में भी बिहार अव्वल रहा। बिहार में कुल 7,030 मामले दर्ज हुए। इसके बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश रहे। तमिलनाडु में जमीन जायदाद से जुड़े सबसे कम 587 दंगे हुए।

हत्या के मामले घटे

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 5.9 फीसद की गिरावट के साथ हत्या के मामलों की संख्या 30,450 से घटकर 28,653 रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद और व्यक्तिगत दुश्मनी 2017 में हत्याओं के दो प्रमुख कारण रहे। उत्तर प्रदेश (4,324) और बिहार (2,803) में हत्या के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा रही।

दुष्कर्म के मामले घटे

2017 में दुष्कर्म के मामलों की कुल संख्या 32,599 रही। इनमें से 10,221 बालिका / बाल पीड़िता थीं। यह संख्या 2013 के बाद सबसे कम है, जब मामलों और पीड़ितों की संख्या 33,707 और 33,764 थी। दुष्कर्म के मामलों की अधिकतम संख्या मध्य प्रदेश (5,562 ) में दर्ज की गई। राजस्थान 3,305 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

जातीय दंगों में भी आई कमी

2016 की तुलना में 2017 में जातीय दंगों में 65 फीसद की कमी आई। जातीय दंगों के मामले में यूपी अव्वल रहा। 2017 में यूपी में जातीय दंगों के 346 मामले सामने आए। 2016 में यह आंकड़ा 899 था।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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