नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मुस्लिम महिला की उस याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया जिसमे उसने तलाक के लिए पति की ओर से दिए गए दो नोटिस को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में रिट याचिका पर विचार नहीं कर सकता है।

जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही मुस्लिम महिला की याचिका का निबटारा कर दिया। पीठ ने कहा कि इस कोर्ट में तलाक के नोटिस को चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने उसे राहत के लिए उचित मंच पर जाने की छूट भी प्रदान कर दी।

महिला की ओर से वकील एमएम कश्यप ने कहा कि पर्सनल लॉ के तहत तलाक-ए-अहसन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि वह याचिका के गुण-दोष में नहीं जा सकती है और याचिकाकर्ता को उचित मंच पर जाना चाहिए।

महिला की शादी 22 फरवरी, 2009 को हुई थी। इस समय उसके नौ और छह साल के दो बच्चे हैं। महिला ने इस तरह की नोटिस देने के लिए पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी अनुरोध किया था। पति ने पहला नोटिस 25 मार्च को और दूसरा नोटिस सात मई को दिया है।

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