नई दिल्ली, प्रेट्र। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता और सांसद मुकुल रॉय ने बुधवार को पार्टी से किनारा कर लिया। पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने पार्टी के राज्यसभा सांसद के पद से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सदस्यों को साथी माना जाना चाहिए न कि नौकर।

दिल्ली में बुधवार को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर रॉय ने राज्यसभा से इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी छोड़ने का बेहद दुख है। उन्होंने यह भी कहा कि 17 दिसंबर 1997 को तृणमूल कांग्रेस के स्थापना पत्र के दिए गए आवेदन पर उनका हस्ताक्षर है। उन्होंने कहा कि तब यह पता नहीं था कि एक दिन ऐसा भी आएगा।

तृणमूल कांग्रेस में दूसरे पायदान के नेता रहे रॉय ने कहा, 'पार्टी में सभी को साथी माना जाना चाहिए न कि नौकर। लेकिन वन मैन पार्टी इस तरह काम नहीं करती है।' भाजपा में जाने के अनुमान के बीच उन्होंने कहा कि 1998 में पश्चिम बंगाल में सीटों का समझौता करते समय तृणमूल नेतृत्व ने कहा था कि भाजपा सांप्रदायिक नहीं है।

पार्टी के लोगों का मानना है कि अगर रॉय भाजपा से हाथ मिलाते हैं तब वह ममता बनर्जी के लिए काफी कठिनाई पैदा कर सकते हैं। वह पार्टी के कई भीतरी राज जानते होंगे जिससे पार्टी का परेशान होना तय है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण रॉय को छह वर्षो के लिए तृणमूल से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 25 सितंबर को उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के बाद वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे।

मुकुल के बेटे शुभ्रांशु ने कहा, तृणमूल में ही रहूंगा

कोलकाता। मुकुल के पुत्र व तृणमूल कांग्रेस विधायक शुभ्रांशु रॉय ने बुधवार को कहा कि वह अपने पिता के साथ नहीं जाएंगे। उत्तर 24 परगना जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र में मौजूद विधायक शुभ्रांशु ने कहा कि यह उनके पिता का व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि वह तृणमूल में हैं और आगे भी बने रहेंगे। मुकुल रॉय के तृणमूल छोड़ने की घोषणा के बाद उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के अनुमान जाहिर किए जाने लगे थे। उस समय भी शुभ्रांशु ने तृणमूल में ही रहने की घोषणा की थी।

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Posted By: Manish Negi

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