उदय प्रताप सिंह, इंदौर। पाकिस्तान से भारत आई मूक-बधिर गीता के माता-पिता की तलाश के कई प्रयासों के बाद अब परभणी (महाराष्ट्र) की मीना वाघमारे ने उस पर अपनी बेटी होने का दावा किया है। इस दावे को पुख्ता करने के लिए दोनों का डीएनए टेस्ट होना है, लेकिन उसके लिए भारत सरकार की अनुमति की दरकार है। छह माह से गीता परभणी में मूक-बधिरों के लिए काम करने वाली पहल फाउंडेशन संस्था के संरक्षण में रह रही है। इस बीच गीता ने कंप्यूटर सीखा और अंग्रेजी लिखना भी सीख लिया है। गीता को भारत आए करीब छह साल हो चुके हैं।

परभणी (महाराष्ट्र) की पहल फाउंडेशन संस्था की निगरानी में है इन दिनों

इंदौर की आनंद मूक-बधिर संस्था के संचालक ज्ञानेंद्र पुरोहित के मुताबिक गीता अंग्रेजी के शब्द लिखने लगी है और वाक्य भी बना रही है। सरकार द्वारा डीएनए मिलान की अनुमति फिलहाल नहीं किए जाने के कारण वह पहल संस्था के आश्रय गृह में ही है। मीना वाघमारे और उनकी बेटी पूजा गीता से मिलने आती रहती हैं। दोनों अपने घर से गीता के लिए खाना भी लाती हैं और गीता भी उनके साथ खाती है। इसके अलावा गीता एक-दो दिन उनके घर पर भी रुकती है।

गीता को सरकारी नौकरी दिलवाने के लिए प्रयास

गीता मूक-बधिर बच्चों की शिक्षक या केयरटेकर बनना चाहती है। ऐसे में अब गीता को सरकारी नौकरी दिलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि भटक कर पाकिस्तान पहुंची गीता को पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज की पहल से भारत लाया गया था। वह इंदौर के मूक-बधिर संगठन के छात्रावास में रही। इसके बाद आनंद मूक-बधिर संस्था के संरक्षण में रही। संस्था उसके स्वजनों की तलाश कर रही है। इस दौरान गीता के विवाह की भी कोशिश की गई।

घर दिलवाने का प्रयास

पुरोहित के मुताबिक, गीता को इसी वर्ष महाराष्ट्र के मंत्री नवाब अली ने गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मान किया था। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के माध्यम से गीता और उसके परिवार को मदद दिलवाने का आश्वासन दिया है। पहल फाउंडेशन के माध्यम से गीता को परभणी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है। मीना वाघमारे के पास पक्का घर नहीं है इसलिए गीता को घर दिलवाने की कोशिश की जा रही है।

Edited By: Arun Kumar Singh