नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। नवीनतम व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (सीएनएनएस) के मुताबिक, अधिकांश भारतीय माताएं शिक्षा की पहुंच से बहुत दूर हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि बिना शिक्षा वाली माताओं का फीसद तीन आयु समूहों में अधिक था। 0-4, 5-9 और 10-19 वर्ष की आयु के बच्चों की माताओं का फीसद क्रमश: 31, 42 और 53 फीसद रहा।

12वीं या उससे अधिक की पढ़ाई

सर्वेक्षण के अनुसार, केवल प्री-स्कूल में पढ़ने वाले 20 फीसद बच्चों की माताओं ने, प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले 12 फीसद बच्चों की माताओं ने और 7 फीसद किशोरों की माताओं ने 12वीं तक या उससे अधिक पढ़ाई की है।

राज्यवार स्थिति

करेल में 0-4 वर्ष की आयु के 60 फीसद बच्चों की माताओं ने 12वीं तक या उससे अधिक पढ़ाई की है। वहीं तमिलनाडु में यह आंकड़ा 51 फीसद रहा। जबकि 16 राज्यों में प्री स्कूल में पढ़ने वाले 20 फीसद से कम बच्चों की माताओं ने 12वीं से अधिक पढ़ाई की है।

ऐसे हुआ सर्वे

ग्रमीण और शहरी क्षेत्र में किए गए सीएनएनएस में तीन जनसंख्या समूह शामिल थे - प्री स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे (0-4 वर्ष आयु), प्राथमिक स्कूल के बच्चे (5-9 वर्ष आयु) और किशोर (10-19 वर्ष आयु)। सैंपल के रूप में 0-4 वर्ष आयु के 38,060 बच्चों, 5-9 वर्ष आयु के 38,355 बच्चों और 10-19 वर्ष आयु के 35,830 किशोरों को शामिल किया गया।

सर्वेक्षण में सैंपलों की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का वर्णन किया गया है, जिसमें उम्र, लिंग, निवास स्थान, माता की स्कूली शिक्षा, जाति, धर्म, घरेलू धन की स्थिति शामिल हैं। यह जानकारी देश के विविध भौगोलिक क्षेत्रों और आबादी में बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और पोषण को प्रभावित करने वाले कारकों को समझने के लिए उपयोगी है।

बच्चों की स्थिति

सर्वेक्षण के मुताबिक, 5-9 वर्ष की आयु के बच्चों में से 91 फीसद, 10-14 वर्ष की आयु के किशोरों में से 52 फीसद और 15-19 वर्ष की आयु के किशोरों में से 48 फीसद स्कूल जा रहे हैं।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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