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देश में चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित, निपटारे में सुस्ती से उपभोक्ताओं की अनदेखी

Publish Date:Fri, 12 Jan 2018 08:55 AM (IST) | Updated Date:Fri, 12 Jan 2018 10:54 AM (IST)
देश में चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित, निपटारे में सुस्ती से उपभोक्ताओं की अनदेखीदेश में चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित, निपटारे में सुस्ती से उपभोक्ताओं की अनदेखी
उपभोक्ता हितों के लिए वर्ष 1986 में उपभोक्ता संरक्षण कानून बनाया गया था। लेकिन बदलते समय के साथ कानून में कई प्रावधान औचित्यहीन हो गए हैं।

नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। 'जागो ग्राहक जागो' की अलख लगातार जगाई जा रही है। लेकिन उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे में हो रहे विलंब से उपभोक्ता हितों की अनदेखी हो रही है। जबकि केंद्र सरकार राज्यों में उपभोक्ता अदालतों के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय मदद करती रही है। इसके बावजूद हालात बहुत संतोषजनक नहीं है।

सवा चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित

देश के जिला उपभोक्ता फोरम, राज्य और केंद्र शिकायत निवारण आयोग में लाखों शिकायतें लंबित हैं। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल कुल सवा चार लाख से अधिक शिकायतें लंबित पड़ी हैं। जबकि केंद्र सरकार की ओर से पिछले तीन सालों के दौरान 3405 करोड़ रुपये की मदद इन उपभोक्ता अदालतों के संचालन, जजों के वेतन और अन्य खर्च के बावत मंजूर की गई थी। राष्ट्रीय आयोग में पिछले तीन सालों में दर्ज शिकायतों में से 50 फीसद से अधिक मामले लंबित हैं।

आगामी बजट में उपभोक्ता संरक्षण पर नया कानून बनने की उम्मीद

उपभोक्ता हितों के लिए वर्ष 1986 में उपभोक्ता संरक्षण कानून बनाया गया था। लेकिन बदलते समय के साथ कानून में कई प्रावधान औचित्यहीन हो गए हैं। बाजार की बदलती प्रकृति के अनुरूप सरकार ने नया कानून बनाने का मसौदा तैयार किया है, जिसे संसद में पारित करने के लिए पेश भी कर दिया गया है। जानकारों के मुताबिक नए कानून के आगामी बजट सत्र में पारित हो जाने की संभावना है।

ज्यादातर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पद खाली

उपभोक्ता अदालतों में नियुक्त होने वाले अध्यक्ष और सदस्यों के लिए विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। उनके वेतन व मानदेय में बहुत अंतर है। ज्यादातर राज्यों के जिला फोरम और राज्य स्तरीय शिकायत निवारण आयोग में सदस्यों व अध्यक्ष के पद खाली चल रहे हैं। इससे लंबित मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। नए कानून के पारित होने और लागू होने तक इन्हीं पुराने प्रावधानों पर अमल किया जाएगा।

मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने का प्रावधान

नए उपभोक्ता संरक्षण कानून में मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने का कड़ा प्रावधान किया गया है। नकली उत्पादन बनाने, बेचने और मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उपयुक्त कानून के अभाव में अभी तक ऐसे अपराधी आसानी से छूट जाते हैं। नए उपभोक्ता कानून के मसौदे में आपराधिक अदालतों में मुकदमा चलाने का प्रावधान किया गया है। ऐसे अपराधियों पर उपभोक्ताओं के नुकसान के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। इसमें उनके ऊपर भारी जुर्माना और जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। लोकसभा में शुक्रवार को पेश किये गये नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक-2018 में उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े कई नए विषय भी जोड़ दिये गये हैं जो अब तक इसमें शामिल नहीं थे।

पुराने कानून में नहीं था ये प्रावधान

पूराने कानून मिलावटी व नकली वस्तुओं का उत्पादन व बिक्री करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार ही नहीं था। वर्ष 1986 के उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे से यह विषय बाहर था, जिसे अब शामिल कर लिया गया है। केवल खाद्य वस्तुओं में मिलावट का मसला फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2006 के दायरे में था, बाकी वस्तुओं पर कानूनी कार्रवार्ई का प्रावधान नहीं के बराबर था। शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन पेश इस विधेयक के अगले बजट सत्र में पारित होने की संभावना है। यह पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून-1986 का स्थान लेगा। उपभोक्ताओं को अगर उस उत्पाद से कोई शारीरिक या मानसिक नुकसान हुआ है तो उसको भी आधार बनाया जाएगा। ऐसे अपराधों के लिए उपभोक्ता अदालतों का पूरा ढांचा मजबूत बनाया जाएगा, जिसमें आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतें भी शामिल होंगी।
 

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Web Title:More than Lakh complaints are painding in Consumer forum(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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