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मानसून की विदाई के साथ गहराया संकट, देश के 38 प्रतिशत हिस्से में सूखे का खतरा; पंजाब-राजस्थान समेत 5 राज्यों पर सूखे की मार

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:35 PM (IST)

अल नीनो के प्रभाव से मानसून की विदाई के बाद देश के लगभग एक तिहाई हिस्से में सूखे का खतरा ...और पढ़ें

देश के 38 प्रतिशत हिस्से में सूखे का खतरा (सांकेतिक तस्वीर)

 देश के 38 प्रतिशत हिस्से में सूखे का खतरा (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. देश के एक तिहाई हिस्से में सूखे का खतरा बढ़ा।

  2. मानसून में 87 प्रतिशत बारिश, 282 जिलों में कम वर्षा।

  3. पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति गंभीर।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अल नीनो असर छोड़ गया है। मानसून की विदाई के साथ देश के लगभग एक तिहाई हिस्से में सूखे का खतरा बढ़ गया है। बारिश में 20 प्रतिशत से अधिक कमी वाले क्षेत्रों में फसल उत्पादन पर व्यापक असर पड़ता है।

केंद्र सरकार को राज्यों से इनपुट आने का इंतजार है, जिसके बाद सहायता देने पर विचार किया जाएगा। इस बीच भारत मौसम विभाग (आईएमडी) से मिली औसत वर्षा की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। पूरे मानसून सीजन में (जून से सितंबर के बीच) देश में कुल 759.4 मिलीमीटर ही बारिश हुई, जो दीर्घकालिक औसत का केवल 87 प्रतिशत है।

1901 के बाद 13वीं सबसे कम और वर्ष 2001 के बाद चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश है। बारिश का वितरण भी इस बार असमान रहा है।

भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पूरे सीजन में 282 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई, जो देश का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें 34 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य से 60 प्रतिशत या उससे भी अधिक कम रही।

राज्यवार देखें तो पंजाब में बारिश 41 प्रतिशत कम रही, जबकि राजस्थान में 22 प्रतिशत और विदर्भ में 27 प्रतिशत की कमी रही। इसके उलट ओडिशा में 30 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में बारिश की कमी करीब 15 प्रतिशत थी, लेकिन अंतिम सप्ताह में हुई बारिश से पूरे मानसून की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई।

हालांकि इससे क्षेत्रीय स्तर पर सूखे का खतरा खत्म नहीं हुआ। यह ध्यान रहे कि सूखे के असर का आकलन जिलावार किया जाता है।

महाराष्ट्र ने 265 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। कर्नाटक में भी खरीफ के लिए सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा की गई है और केंद्रीय टीम तीन अक्टूबर को जमीनी आकलन करेगी। केंद्र को कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे को लेकर चिंता है।

कम बारिश का असर खरीफ की खेती पर पड़ा है। कुल बोआई रकबा पिछले साल के लगभग बराबर है, लेकिन धान का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में कुल खेती के रकबे में कमी आई है। इसके विपरीत उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर का रकबा बढ़ा है।

सूखे का आकलन केवल बारिश की कमी से नहीं होता। बारिश, फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, जलस्रोत, बुआई और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर स्थिति तय की जाती है।

केंद्र सरकार अपने स्तर से किसी जिले को सूखा प्रभावित घोषित नहीं करती। राज्य वैज्ञानिक आकलन और जमीनी सर्वे के आधार पर केंद्र से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) से मदद मांग सकते हैं। इसके बाद केंद्रीय टीम प्रभावित क्षेत्र का आकलन करती है।

सूखा घोषित होने पर फसल नुकसान 33 प्रतिशत या उससे अधिक होने की स्थिति में निर्धारित मानकों के अनुसार इनपुट सहायता, पेयजल, पशुओं के लिए चारा-पानी और अन्य राहत उपाय किए जा सकते हैं। किसानों के लिए ऋण संबंधी राहत भी नियमों के तहत दी जाती है।

इस बार चिंता इसलिए अधिक है कि कम बारिश एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं रही। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी बारिश सामान्य की केवल 74 प्रतिशत और दक्षिण प्रायद्वीप में 76 प्रतिशत रही, जबकि मध्य भारत में यह 97 प्रतिशत रही।