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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 20, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Monsoon 2022 Update: कमजोर मानसून भारतीय कृषि आर्थिकी के लिए बन सकता है आपदा, जानें- विशेषज्ञों की राय

By Sanjeev TiwariEdited By:
Published: Mon, 20 Jun 2022 10:03 AM (IST)

Monsoon 2022 देश की वार्षिक वर्षा में मानसून का हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत है और यह शुद्ध बोए गए क्षेत्र ...और पढ़ें

कमजोर मानसून कृषि के लिए आपदा का कारण बन सकता (फाइल फोटो)
कमजोर मानसून कृषि के लिए आपदा का कारण बन सकता (फाइल फोटो)

नई दिल्ली, प्रेट्र। पहले से ही प्रचंड गर्मी के दुष्परिणामों से जूझ रहे भारत में कृषि आधारित आर्थिकी के लिए कमजोर मानसून आपदा का कारण बन सकता है। ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। हालांकि उन्हें मानसून की बारिश के फिर से शुरू होने की उम्मीद है। उनके अनुसार इससे खाद्य मुद्रास्फीति कम होगी और साथ ही खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। देश की वार्षिक वर्षा में मानसून का हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत है और यह शुद्ध बोए गए क्षेत्र का 60 प्रतिशत भाग सिंचित करता है। देश की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।

कमजोर मानसून का मतलब हमेशा कम फसल उत्पादन और मुद्रास्फीति होता है। हीटवेव यानि लू के एक शुरुआती हमले ने पहले ही रबी फसलों को प्रभावित किया है। इससे सरकार को गेहूं के निर्यात पर अंकुश लगाने और उत्पादन पूर्वानुमानों में लगभग पांच प्रतिशत (111.3 मिलियन टन से 106.4 मिलियन टन) की कटौती करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

मौसम विभाग ने जहां लगातार चौथे साल मानसून सामान्य रहने की भविष्यवाणी की है, वहीं जून के पहले पखवाड़े में इसकी धीमी रफ्तार ने धान जैसी फसलों की रोपाई में देरी की संभावना जताई है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि इसमें तेजी आने और किसी भी कमी की भरपाई करने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मानसून की भविष्यवाणी अच्छी है और बारिश तेजी पकड़ रही है। देश भर में वर्षा की कमी 11 जून को 43 प्रतिशत से घटकर 17 जून को 18 प्रतिशत रह गई है।

उन्होंने कहा कि प्रायद्वीपीय भारत, देश के पूर्व और मध्य भागों के अलावा पुर्वोत्तर में सामान्य वर्षा जारी है। 23 जून के बाद उत्तर पश्चिम भारत में वर्षा में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर औसतन सामान्य वर्षा होगी।

जुलाई में कम बारिश हुई तो गंभीर होंगे परिणाम: शर्मा

खाद्य और व्यापार नीति विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि इस साल भीषण गर्मी ने गेहूं की पैदावार को प्रभावित किया है और देश को पर्याप्त चावल उत्पादन के लिए सामान्य मानसून की जरूरत है। जून के पहले भाग में मानसून सुस्त रहा है। देश के कुछ हिस्सों में वर्षा की कमी 80 प्रतिशत तक है। शर्मा ने कहा कि यह निश्चित रूप से उपज को प्रभावित करेगा। कुछ रिपोटोर्ं में कहा गया है कि अगले दो महीनों में बारिश की कमी जारी रहेगी। अगर जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में बारिश की कमी जारी रहती है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

खाद्य मुद्रास्फीति के लिए हीटवेव, अस्थिर वैश्विक बाजार जिम्मेदार

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) के प्रधान वैज्ञानिक प्रोफेसर विनोद सहगल ने कहा कि जून के अंत तक बारिश की कमी की भरपाई कर दी जाएगी। जुलाई में अच्छी बारिश की उम्मीद है। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि लंबे समय तक गर्म हवाओं ने मिट्टी से नमी को सोख लिया है। सहगल ने खाद्य मुद्रास्फीति के लिए हीटवेव और अस्थिर वैश्विक बाजारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण विश्व स्तर पर गेहूं की मांग बढ़ी।

देश में अब तक कम बारिश, लेकिन जल्द होगा सुधार : स्काईमेट

स्काईमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मानसून तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। जहां तक कृषि क्षेत्र का संबंध है तो देश में अब तक कम बारिश हुई है। लेकिन साथ ही कहा कि स्थिति जल्द ही बदलने वाली है। मौसम विज्ञानी ने कहा कि तीन से चार दिनों में बंगाल, उत्तरी ओडिशा और इससे सटे बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बन जाएगा जो भारत-गंगा के मैदानी इलाकों में हवा के पैटर्न को बदल देगा। उन्होंने कहा कि यह चक्रवाती परिसंचरण सामान्य पूर्वी प्रवाह की शुरुआत करेगा जो उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून के आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है। पंजाब और हरियाणा में किसान मानसून पर निर्भर नहीं हैं। उनके पास अपने संसाधन और सिंचाई का नेटवर्क है।