नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भारत ने अगले माह संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाक समकक्ष नवाज शरीफ की मुलाकात की किसी संभावना को नकार दिया है। भारत के मुताबिक विदेश सचिव स्तर की वार्ता में संभावना थी कि इस मामले पर बात होती लेकिन इसके रद होने के बाद दोनों नेताओं की अमेरिका में मुलाकात का कोई कार्यक्रम नहीं है। साथ ही भारत ने स्पष्ट किया है कि बीते कुछ वक्त में दिखे माहौल ने विदेश सचिव स्तर वार्ता रद करने का फैसला लेने पर मजबूर किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस्लामाबाद में तय की गई विदेश सचिव स्तर बातचीत किसी तरह की ठोस वार्ता नहीं थी। इसमें भविष्य में वार्ता के लिए जमीन तैयार की जानी थी। हालांकि बीते कुछ समय के दौरान पाक की ओर से उठाए कदम वार्ता के लिए उपयुक्त माहौल बनाने वाले नहीं हैं लिहाजा हमने इसे निरस्त करने का फैसला किया।

मोदी के साथ ही पाक के प्रधानमंत्री शरीफ को भी न्यूयार्क में अगले माह संयुक्त राष्ट्र महासभा में शिरकत के लिए मौजूद रहना है। वैसे नवंबर में काठमांडू में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन में भी दोनों नेताओं का आमना-सामान होना है। हालांकि भारतीय खेमा स्पष्ट कर चुका है कि सार्थक वार्ता की ओर कोई भी कदम तभी संभव है जब इसके लिए माहौल माकूल हो।

पाक ने तोड़ी परंपराइस बीच भारत-पाक वार्ता के इतिहास की डायरी में कूटनीतिक बातचीत से पहले कश्मीरी हुर्रियत नेताओं से मशविरे की परंपरा को लेकर पाकिस्तानी दलील भी अ‌र्द्धसत्य है। इतना ही नहीं पाकिस्तान की ओर से सामान्य से अलग बर्ताव ने ही भारत को विदेश सचिव वार्ता रद करने जैसा सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया।

दरअसल, यह पहला मौका था जब पाक उच्चायोग ने इस्लामाबाद में होनी वाली किसी कूटनीतिक वार्ता से पहले हुर्रियत नेताओं को मुलाकात के लिए बुलाया था जबकि पूर्व में हुई ऐसी सभी मुलाकातें पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ नेता या अधिकारी के आने पर हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि 1995 में भारत आए पाक के राष्ट्रपति फारूख अहमद लेघारी के दौरे के बाद से पाकिस्तान ने भारतीय जमीन पर होने वाली किसी द्विपक्षीय वार्ता से पहले कश्मीरी नेताओं से मशविरे को परंपरा बना लिया था। हालांकि, पाकिस्तान में होने वाली कूटनीतिक वार्ता से पहले इस तरह की कवायद की कोई परंपरा नहीं रही। ऐसे में इस बार जब पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में होने वाली विदेश सचिव वार्ता से पहले अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात की तो भारतीय खेमे ने इस पर ब्रेक लगाने का फैसला लिया।

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