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भारत-रूस संबंध का नया रोडमैप: परमाणु से रक्षा तक 100 बिलियन डॉलर का ड्राफ्ट तैयार

Published: Fri, 11 Sep 2026 10:14 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 11 Sep 2026 10:18 PM (GMT+05:30)

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने नई दिल्ली में मुलाकात कर भारत-रूस संबंधों का नया रोडमैप तैयार किया।

भारत-रूस संबंध का नया रोडमैप।

भारत-रूस संबंध का नया रोडमैप।

HighLights

  1. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की नई दिल्ली में मुलाकात।

  2. 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य निर्धारित।

  3. परमाणु ऊर्जा, रक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुप्रतीक्षित मुलाकात शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुई। यह पखवाड़े भर में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात है और मई 2014 के बाद उनकी 21वीं द्विपक्षीय बैठक। दोनों इस साल के अंत में भारत-रूस के 24वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में फिर मिलने पर भी सहमत भी हो गए हैं।

शुक्रवार की बैठक केवल मध्यकालिक और दीर्घकालिक रोडमैप तय करने के लिए नहीं थी। यह उन ताकतों के लिए भी संकेत थी, जो भारत-रूस रिश्ते किसी न किसी बहाने कमजोर करने की कोशिश करते हैं।

द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य

बैठक में मोदी और पुतिन के बीच परमाणु ऊर्जा से लेकर दुर्लभ खनिजों के खनन और रूस के साथ उर्वरक व ऊर्जा आयात से लेकर रूस में भारत के प्रशिक्षित कामगारों को ज्यादा अवसर देने जैसे मुद्दे खास तौर पर उठे। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार के लक्ष्य को 100 अरब डॉलर करने के लिए उठाये जाने वाले कदमों की भी समीक्षा की।

पीएम मोदी ने बैठक के बाद कहा कि, “दो हफ्ते के भीतर दूसरी बार राष्ट्रपति पुतिन से मिल कर काफी प्रसन्नता हुई। हमने कारोबारी संबंधों को प्रगाढ़ करने, वर्ष 2030 के आर्थिक कार्यक्रम को लागू करने, ऊर्जा, खनिज, ढांचागत सुविधाओं के विकास व रक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात की।”

भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल आवाजाही और जन-संपर्क के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर तक आयोजित रूसी औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ का स्वागत किया और कहा कि इससे व्यापार व औद्योगिक रिश्ते और मजबूत होंगे।

बैठक के बाद दोनों नेता इस प्रदर्शनी में भी गए और प्रतिभागियों से बात की। ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता के तहत बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया और ब्लैक सीक्षेत्र के संघर्षों पर विचार-विमर्श हुआ, जिनका समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है।

विवादों का हल संवाद और कूटनीति से ही निकलेगा- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने दोहराया कि विवादों का हल संवाद और कूटनीति से ही निकलेगा। भारत शांति प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है। दोनों नेता विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमत हुए। रूस के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि राष्ट्रपति पुतिन ने भारतीय पीएम को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

एमईए के अधिकारियों ने बताया है कि शुक्रवार की बैठक में रक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम-एशिया संघर्ष पर बात हुई लेकिन इस बारे में दोनों नेता बिश्केक (एससीओ सम्मेलन) में 1 सितंबर, 2026 को ही विस्तार से बात कर चुके थे। लिहाजा इस बैठक का जोर ज्यादातर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर केंद्रित रहा। हां, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष और यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग से माल ढुलाई के प्रभावित होने और नाविकों के जीवन पर खतरा पैदा होने का मुद्दा बहुत ही गंभीरता से उठाया।

हाल के वर्षों में बहुत ही कम विदेश दौरा करने वाले पुतिन इस बार तीन दिनों तक भारत में रहेंगे। दिसंबर 2021 में दिल्ली आने पर वे केवल छह घंटे रुके थे। यही नहीं 11 सितंबर को सुबह 1.15 बजे उनका विशेष जहाज नई दिल्ली स्थिति पालम एयरपोर्ट पहुंचा और पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में आने वाले सबसे पहले वैश्विक नेता बने।

जानकार इसे रूस की तरफ से भारतीय नेतृत्व को यह भरोसा दिलाने का तरीका है कि वह इस द्विपक्षीय संबंधों को कितनी गंभीरता से लेता है।

और जारी रही कार डिप्लोमेसी

मोदी और पुतिन की बैठक हो और ‘कार डिप्लोमेसी’ ना हो, यह हो नहीं सकता। शुक्रवार को भी द्विपक्षीय बैठक समाप्त होते ही पीएम मोदी राष्ट्रपति पुतिन की हाथ पकड़ कर बाहर निकले और कार में एक साथ बैठ कर भारत मंडपम की प्रदर्शनी पहुंचे। पिछले दो वर्षों में यह चौथा मौका है जब दोनों नेता साथ कार में सफर कर चुके हैं। इस डिप्लोमेसी की सबसे चर्चित घटना चीन में हुई।

तियानजिन में पुतिन की कार में दोनों करीब 45 मिनट तक बात करते रहे। मंजिल आ चुकी थी, बात नहीं रुकी। बाहर सुरक्षाकर्मी और दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारी इंतजार करते रहे। वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इसे ‘कार डिप्लोमेसी’ कहा गया।

औपचारिक मेज के बाहर, बंद गाड़ी में चलने वाली यह बातचीत निजी भरोसे की निशानी मानी गई। दिल्ली में भी वही शैली दोहराई गई। बैठक के बाद अलग-अलग काफिले की जगह एक कार चुनी गई। अस्थिर विश्व में भारत और रूस के रिश्तों पर दबाव की चर्चा होती है, तब ऐसे छोटे दृश्य बड़ी भाषा बोलते हैं।