'संबंधों में विकास के लिए सीमा पर शांति जरूरी', पीएम मोदी ने चिनफिंग के सामने उठाया कारोबार असंतुलन का मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में द्विपक्षीय मुलाकात की। मोदी ...और पढ़ें
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पीएम मोदी ने चिनफिंग के सामने उठाया कारोबार असंतुलन का मुद्दा (फोटो- PTI)
HighLights
प्रधानमंत्री मोदी और शी चिनफिंग की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय मुलाकात हुई
मोदी ने सीमा पर शांति और स्थिरता को संबंधों की अनिवार्य शर्त बताया
चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय मुलाकात शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में हुई।
बैठक के बाद भारत की ओर से जारी बयान से साफ है कि प्रधानमंत्री ने उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जिनसे दोनों देशों के संबंध बार-बार प्रभावित होते रहे हैं। इनमें सीमा पर अमन-शांति बनाए रखना सबसे अहम है।
भारत ने शीर्ष स्तर पर इस मुद्दे को स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति बना कर रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। साथ ही चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे (आयात ज्यादा, निर्यात कम) का मुद्दा भी भारतीय पीएम ने बैठक में साफ तरीके से उठाया। चीन ने इस असंगत को दूर करने का आश्वासन दिया है।
यह दोनों नेताओं की एक पखवाड़े में दूसरी मुलाकात है। मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी किसी भी वैश्विक नेता से सबसे ज्यादा बार मिले हैं तो वह चिनफिंग ही हैं। अब तक करीब दो दर्जन मुलाकातें हो चुकी हैं।
पिछले दो वर्षों में ही चार बार दोनों नेता आमने-सामने बैठे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही बिश्केक में दोनों नेता मिले थे। दोनों पक्षों ने तब से संबंधों में आई स्थिर प्रगति का स्वागत किया है। यह चिनफिंग की सात वर्षों भारत यात्रा है। उनके साथ बहुत बड़ा दल भारत आया है, जो वहां की सरकार की गंभीरता को दिखाता है।
इसमें चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक बेहद कद्दावार नेता व सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के जनरल आफिस के निदेशक काई ची भी शामिल हैं। काई ची को चीन के भावी राष्ट्रपति के तौर पर भी देखा जाता है।
विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। मतभेद विवाद न बनें। उन्होंने तीन सूत्रों, आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को केंद्र में रख कर काम करने की सलाह दी है।
मोदी ने साफ किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के विकास की अनिवार्य शर्त है। दोनों पक्षों को सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करना चाहिए। नेताओं ने सीमा विवाद का निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संपर्क और आवाजाही बढ़ाने की जरूरत बताई गई। आर्थिक संबंधों में एक-दूसरे की चिंताओं, खासकर व्यापारिक असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार पहुंच के मुद्दे को हल करने पर जोर दिया गया।
मोदी ने कारोबारी असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए चीन के बाजार को ज्यादा खोलने की बात कही है। चीन की तरफ से भारत की चिंताओं को सुना गया है और इन्हें दूर करने का आश्वासन दिया गया है।यह बैठक उस समय हुई जब अरुणाचल प्रदेश में दोनों देशों के बीच कुछ तनाव की खबरें आई हैं।
इसके समाधान के लिए अरुणाचल सीमा के पास दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच लगातार दो दिनों तक बैठकें चली हैं। हालांकि संबंधों में सुधार के भी कुछ संकेत मिल रहे हैं। मोदी व चिनफिंग की मुलाकातें, सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर वार्ता संबंधों में सुधार की कोशिशों को बताते हैं।
