नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। इस साल से पराक्रम दिवस से ही गणतंत्र दिवस का समारोह शुरू हो जाएगा। पिछले साल केंद्र सरकार ने 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। अभी तक 24 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल के साथ गणतंत्र दिवस समारोहों की शुरुआत होती थी और 29 नवंबर को बीटिंग रिट्रीट के साथ इसका समापन होता था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस को लेकर पिछले पांच छह वर्षो में मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पुरानी मांग को देखते हुए उनसे जुड़े पुराने दस्तावेज इसी सरकार में सार्वजनिक किए गए थे। उनके जन्मदिन 23 जनवरी से गणतंत्र दिवस से जोड़े जाने का बड़ा राजनीतिक संकेत है।

मोदी सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र को सबसे अगली पंक्ति के नेताओं में खड़ा किया है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को भारत की पहली स्वाधीन सरकार की घोषणा की थी और इसके बाद 19 मार्च 1944 को आजाद हिंद फौज ने पहली बार भारत की धरती पर मणिपुर में तिरंगा फहराया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर सरकार ने स्वाधीनता संग्राम में उनके योगदान को अहमियत दी थी। पराक्रम दिवस से गणतंत्र दिवस समारोहों की शुरुआत को इसी क्रम में देखा जा रहा है। इसके पहले भी मोदी सरकार भारतीय संस्कृति और स्वाधीनता की रक्षा से जुड़े अहम घटनाओं को विशेष दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर चुके हैं।

पिछले दिनों सरकार ने दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों की शहादत को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है। इसके पहले सरकार ने देश के बंटवारे की त्रासदी को याद करने के लिए 14 अगस्त को विभाजन भयावहता स्मरण दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। इसी तरह से मोदी सरकार ने आजादी के बाद देश की एकता में अहम भूमिका निभाने वाले सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंकने वाले भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस और 1949 में संविधान के पूरा होने के दिन 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

Edited By: Ramesh Mishra