जब बैकफुट पर आई केंद्र सरकार: इन मामलों में भी मोदी सरकार को पीछे खींचने पड़े कदम
नीट पेपर लीक विवाद मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा हो गया है। 2014 में सत्ता ...और पढ़ें

इन मामलों में भी मोदी सरकार को पीछे खींचने पड़े कदम
HighLights
मोदी सरकार को जनता और राजनीतिक दबाव में पीछे हटना पड़ा है
जब चौतरफा दबाव के बीच केंद्र सरकार को बदलने पड़े अपने निर्णय
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा हो गया है। 2014 में सत्ता में आने के बाद से यह पहला मामला नहीं है, जब मोदी सरकार को जनता और राजनीतिक दबाव में पीछे हटना पड़ा है। आइये जानते हैं ऐसी और घटनाओं के बारे में।
भूमि अधिग्रहण विधेयक में बदलाव की वापसी
2015
कारण: किसान संगठनों, विपक्षी दलों और एनडीए सहयोगियों का कड़ा विरोध।
परिणाम: सरकार ने संशोधन अध्यादेश की समय-सीमा समाप्त होने दी। मूल कानून को लागू रहने दिया।
एमजे अकबर का इस्तीफा
अक्टूबर 2018
कारण: मी टू आंदोलन के दौरान कई महिला पत्रकारों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप।
परिणाम: तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
तीनों कृषि कानूनों की वापसी
नवंबर 2021
कारण: दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का एक साल तक चला राष्ट्रव्यापी आंदोलन।
परिणाम: सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को संसद के जरिये निरस्त किया।
यूपीएससी लेटरल एंट्री विज्ञापन रद
अगस्त 2024
कारण: आरक्षण का प्रविधान न होने पर विपक्ष और सहयोगी दल (एलजेपी - रामविलास) का विरोध।
परिणाम: केंद्र सरकार ने उच्च पदों के लिए लेटरल भर्ती का विज्ञापन वापस लिया।
131वां संविधान संशोधन विधेयक टला
नवंबर 2025
कारण: पंजाब के राजनीतिक दलों द्वारा राज्य की राजनीतिक नुमाइंदगी घटने की आशंका पर विरोध।
परिणाम: सरकार ने विधेयक पेश करने का विचार टाल दिया।
स्रोत: पीटीआई
