मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] अब राज्य की ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़कर शिवसेना को सबक सिखाने का मन बनाने लगी है। यह इरादा वह पिछले दो दिनों में शिवसेना की ओर से दिखाए गए अपमानजनक रुख के बाद बना रही है।

शिवसेना से ही करीब सात साल पहले अलग हुए राज ठाकरे इस बार अपनी पार्टी को लोकसभा चुनाव न लड़वाने या चुनिंदा सीटों पर ही लड़वाने का मन बना रहे थे। इस संबंध में उनकी भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से बात भी चल रही थी। सोमवार की शाम राज और गडकरी के बीच हुई ऐसी ही एक मुलाकात के बाद शिवसेना ने अपने तेवर तीखे कर लिए। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की ओर से भाजपा को धमकियां दी गई कि यदि उसने राज ठाकरे से बातचीत जारी रखी तो शिवसेना के साथ उसका गठबंधन खतरे में पड़ सकता है। शिवसेना के इस कड़े रुख से राज को नरम करने की सारी संभावनाओं पर पानी फिरता दिख रहा है। राज ने महाराष्ट्र की ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने आवास मातोश्री में संवाददाताओं से बातचीत में मनसे को जोड़कर महागठबंधन बनाने की किसी भी संभावना से इन्कार कर दिया। उद्धव ने शिवसेना के मुख पत्र सामना के संपादकीय में गडकरी को घाघ व्यवसायी बताते हुए लिखा है कि वह इतने चतुर हैं कि मनसे प्रमुख को बगैर किसी दक्षिणा [पैसे] का प्रस्ताव दिए ही उनके समर्थन की मांग की। गौरतलब है कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने 2009 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। तब उसे वोट तो 4.2 फीसद ही मिले थे, लेकिन उसने नौ लोकसभा सीटों पर शिवसेना-भाजपा की हार सुनिश्चित कर दी थी। लोकसभा चुनाव में अपने अच्छे प्रदर्शन के कुछ माह बाद ही हुए विधानसभा चुनाव में मनसे 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर 13 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। इस बार मनसे की ताकत कुछ घटी हुई मानी जा रही है। इसके बावजूद मनसे के उम्मीदवार कई सीटों पर सेना-भाजपा गठबंधन को नुकसान पहुंचाने लायक वोट पा सकते हैं। आम आदमी पार्टी द्वारा भी चुनाव लड़ने की स्थिति में राजग गठबंधन को यह नुकसान और भारी पड़ सकता है।

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