नीलू रंजन, नई दिल्ली। हेलीकाप्टर घोटाले के मुख्य आरोपी जेम्स क्रिश्चियन मिशेल के चाहने के बावजूद भारतीय एजेंसियों से पूछताछ नहीं होने के कांग्रेस के आरोपों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईडी ने साफ कर दिया है कि मिशेल ने अभी तक उनके सम्मन का कोई जबाव नहीं दिया है। जबकि मिशेल को सम्मन भेजने के साथ-साथ उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट और रेड कार्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मिशेल मीडिया में सफाई जरूर दे रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी जांच एजेंसी का सामना करने की हिम्मत नहीं कर पाया है। यहां तक कि इटली की जांच एजेंसी के सामने भी वह सामने नहीं पेश हुआ। इटली की अदालत के फैसले के अंग्रेजी में अनुवाद करा चुके ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 1993 से ही भारत आता रहा है और उसके राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के साथ गहरे ताल्लुकात थे। उनके अनुसार जांच एजेंसियों के पास पुख्ता सबूत हैं कि अगस्ता वेस्टलैंड से हेलीकाप्टर खरीदने के मामले में उसने कुल 70 मिलियन पाउंड की रिश्वत ली थी। यही नहीं, मिशेल ने ही लंदन और भारत स्थित अन्य बिचौलियों के बीच रकम का बंटवारा किया था।

ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत की कंपनियों में भी दलाली की रकम आई थी और उनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ को ईडी जब्त भी कर चुका है और जबकि अन्य की जांच की जा रही है। जांच में आ रही दिक्कतों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि रिश्वत की रकम की लेन-देन का सबूत जुटाने के लिए आठ देशों में एलआर भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी भी देश का जबाव नहीं आया है। उनके अनुसार रिश्वत की रकम इन देशों की कंपनियों के मार्फत ही बांटी गई थी। अब ईडी विदेश मंत्रालय को इन देशों से एलआर का जबाव जल्द भेजने के लिए कूटनीतिक दबाव के इस्तेमाल का अनुरोध करेगा।

आगस्ता वेस्टलैंड के मामले में भ्रष्टाचार के मुद्दे को भटका रहा विपक्ष

Edited By: Manish Negi