नई दिल्ली,एजेंसी। भारत की लाइफ लाइन कही जाने वाली भारतीय रेलवे अपने यात्रियों का सफर आसान बनाने के लिए काफी सारे बदलाव करता रहता है। इसी दिशा में रेलवे ने ऑनलाइन रिजर्वेशन की सुविधा शुरू की थी। लेकिन यात्री गण ऑनलाइन रिजर्वेशन पर ज्यादा खर्च करने के लिए तैयार हो जाए। क्यों अब आपको ऑनलाइन रिजर्वेशन पर ज्यादा खर्च करना होगा। डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए जो सर्विस चार्ज खत्म किया गया था। अब जल्द ही वह वसूला जाने लगेगा।

3 अगस्त को रेलवे मंत्रालय ने एक पत्र जारी किया जिसके मुताबित मंत्रालय ने फैसला किया है कि संचालन लागत फिर से वसूली जाएगी, जिसमें मार्केटिंग और बिक्री सेवाएं शामिल हैं। जानकारी के लिए बता दें कि पहले स्लीपर क्लास के टिकट पर 20 रुपये और एसी बोगी में सीट के लिए 40 रुपये का सर्विस चार्ज देना पड़ता था।

खबर हो की 2016 में जब नोटबंदी हुई उससे पहले तक ई-टिकटों पर सर्विस चार्ज वसूला जाता था। इससे जो पैसा इकट्ठा होता था उसका इस्तेमाल आइआरसीटीसी (IRCTC) ई-टिकटिंग सिस्टम के लिए इसका इस्तेमाल करता था। सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय ने रेलवे मंत्रालय को सलाह दी थी कि वह सर्विस चार्ज न वसूल साथ ही वादा किया था कि संचालन का खर्च रीइम्बर्स किया जाएगा। इसके बाद इस साल 19 जुलाई को वित्त मंत्रालय ने रेलवे को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि ई-टिकटिंग सिस्टम की संचालन लागत पूरा करने के लिए रीइम्बर्समेंट की व्यवस्था टेंपररी थी।

शुरुआत में जो निर्देश दिए गए थे। उनक् मुताबिक सर्विस चार्ज न वसूले जाने की यह व्यवस्था जून 2017 तक के लिए थी। हालांकि, बाद में कई बार इसकी समय सीमा बढ़ाई गई और अभी तक पुरानी व्यवस्था को बहाल नहीं किया गया है। इस दौरान IRCTC की कमाई में भी कमी आई क्योंकि, सर्विस चार्ज से होने वाली कमाई का रेलवे की कुल आय में बड़ा योगदान रहता था। सूत्रों की जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्रालय द्वारा IRCTC को 88 करोड़ का रीइम्बर्समेंट दिया जाना था, लेकिन यह पार्याप्त नहीं था। अब सूत्रों ने बताया कि इस मामले पर IRCTCके डायरेक्टर्स चर्चा करेंगे और इसके बाद ही सर्विस चार्ज की दर तय की जाएगी।  

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Posted By: Ayushi Tyagi

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