नई दिल्ली, एएनआइ। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम लीबिया में विकास की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और बर्लिन साम्राज्य और काहिरा घोषणा के बाद लीबिया (UNSMIL) में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन मिशन के तत्वावधान में मोरक्को के साम्राज्य और मॉन्ट्रो में स्विटजरलैंड द्वारा की गई इंट्रा-लीबिया वार्ता में प्रगति पर ध्यान दिया है। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि हम लीबिया की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता को संरक्षित करते हुए, लीबिया के लोगों की वैध आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, इंट्रा-लीबिया संवाद के माध्यम से संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के उद्देश्य से किए गए इन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का स्वागत करते हैं। 

वहीं, दूसरी ओर रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र की लीबिया पर एक रिपोर्ट को जारी होने से रोक दिया। रिपोर्ट में रूस पर आरोप लगाए हैं कि उसने लीबिया में कमांडर खलीफा हिफ्तार के नेतृत्व वाले गुट को हथियारों की मदद देकर अंतरराष्ट्रीय नियमों की अवहेलना की है।

रिपोर्ट को जारी होने से रोकने के लिए चीन ने रूस का साथ देने को अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल किया। लीबिया पर प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र की समिति की अध्यक्षता कर रहे जर्मनी ने यह रिपोर्ट तैयार की है। संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के उप राजदूत गनटर सौटर ने बताया कि उन्होंने रिपोर्ट जारी करने पर रोक लगाने के खिलाफ सुरक्षा परिषद में मुद्दा उठाया है।

लीबिया को लेकर रूस और तुर्की के बीच भी हुई थी बात

वहीं, जुलाई माह में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन और उनके तुर्की समकक्ष रेसेप तईप एर्दोगन ने एक दूसरे से फोन पर लंबी वार्ता की थी। दोनों नेताओं ने सीरिया और लीबिया के मुद्दों पर चर्चा की थी। इस दौरान पुतिन और एर्दोगन ने सीरियाई समस्‍या के समाधान के लिए प्रयासों को और भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। दोनों नेताओं के बीच 1 जुलाई को आयोजित रूसी-तुर्की-ईरानी ऑनलाइन शिखर सम्मेलन पर भी चर्चा हुई थी। दोनों नेताओं ने इस समझौते पर अपनी सहमति प्रगट की थी।

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